कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रही राजनीतिक और संगठनात्मक लड़ाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न का विकल्प देना पड़ा है। आयोग ने फिलहाल दोनों पक्षों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
चुनाव आयोग ने गुरुवार, 17 सितंबर को दोनों गुटों की दलीलें सुनने के बाद अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग के निर्देश के मुताबिक, दोनों पक्षों को शुक्रवार, 18 सितंबर की सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के नए पार्टी नाम और चुनाव चिह्न की जानकारी देनी थी। हालांकि, निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले ही दोनों गुटों ने आयोग के समक्ष अपने विकल्प भेज दिए।
ऋतब्रत बनर्जी गुट ने पार्टी नेताओं के साथ ऑनलाइन बैठक करने के बाद तीन नामों का चयन किया। इस गुट की ओर से ‘नेशनलिस्ट तृणमूल कांग्रेस’, ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ और ‘पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस’ नाम चुनाव आयोग को सौंपे गए हैं। गुट ने आयोग के अंतरिम आदेश का स्वागत भी किया है। अब इन नामों और चुनाव चिह्नों पर अंतिम फैसला चुनाव आयोग को करना है।
दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट ने भी आयोग के निर्देश के जवाब में अपनी ओर से तीन नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प उपलब्ध करा दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने आयोग के अंतरिम आदेश पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने आदेश जारी होने के कुछ ही घंटे बाद गुरुवार रात करीब 11 बजकर 36 मिनट पर अपना जवाब आयोग को भेजा था। उनके गुट ने आयोग के सामने नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प रखे हैं।
आयोग का यह आदेश ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजिनगर में उपचुनाव होने हैं। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है और दोनों ही गुटों ने इन चुनावों के लिए अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। ऐसे में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर आयोग का फैसला दोनों पक्षों के लिए चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल स्थिति यह है कि ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम किसी भी गुट को अकेले इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। इसी तरह पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न भी दोनों पक्षों के लिए फिलहाल उपलब्ध नहीं रहेगा। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के कारण इस नाम और चिह्न को अस्थायी रूप से अलग रखा गया है, जब तक कि विवाद पर आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
अब निगाहें चुनाव आयोग के अगले फैसले पर टिकी हैं। दोनों गुटों ने अपनी ओर से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प दे दिए हैं और आयोग को इन प्रस्तावों पर निर्णय करना है। उपचुनाव की तारीख नजदीक होने के कारण जल्द फैसला आने की संभावना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े संगठनात्मक विवाद को चुनावी मैदान तक पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि आयोग दोनों गुटों को कौन से नाम और चुनाव चिह्न आवंटित करता है और नंदीग्राम तथा रेजिनगर के उपचुनाव में दोनों पक्ष किस पहचान के साथ जनता के बीच जाते हैं।