सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ने भारतीय जनता पार्टी पर शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। त्रिवेदी के मुताबिक, राहुल गांधी का यह दावा राजनीतिक दलों के गठन और उनके इतिहास की जानकारी से मेल नहीं खाता।
भाजपा नेता ने कहा कि जिन दलों का राहुल गांधी ने अपने बयान में जिक्र किया है, उनके राजनीतिक इतिहास को समझना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन कांग्रेस से अलग होकर हुआ था। उनके मुताबिक, ऐसे में इन दलों के अस्तित्व को भाजपा की वजह से कांग्रेस से अलग होने के रूप में पेश करना सही तस्वीर नहीं बताता।
त्रिवेदी ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को पहले अपनी पार्टी से अलग होकर बने राजनीतिक दलों के इतिहास को देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक परिस्थितियों और दलों के गठन के पीछे अलग कारण रहे हैं और सभी घटनाओं को एक ही राजनीतिक पैटर्न के तौर पर देखना उचित नहीं है।
भाजपा नेता की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े पार्टी नाम और चुनाव चिह्न के विवाद ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी अंतरिम व्यवस्था के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को कमजोर कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में शिवसेना और NCP के विवादों का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि अलग-अलग मामलों में पार्टी के विभाजन के बाद चुनाव चिह्न से जुड़े फैसले सामने आए और अब तृणमूल कांग्रेस को लेकर भी इसी तरह की स्थिति बन रही है। राहुल गांधी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और मतदाताओं के अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए।
इसके जवाब में सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का संदर्भ देते हुए राहुल गांधी के आरोपों को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और NCP के गठन की परिस्थितियों को नजरअंदाज करके मौजूदा विवादों को केवल भाजपा के साथ जोड़ना तथ्यों की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता।
इस राजनीतिक विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश तृणमूल कांग्रेस से जुड़े गुटों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में आया है। आयोग की व्यवस्था के तहत विवाद से जुड़े पक्षों को उपचुनाव में अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ना होगा। अंतिम निर्णय आने तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहने की बात कही गई है।
राहुल गांधी और सुधांशु त्रिवेदी के बयानों से साफ है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। एक ओर राहुल गांधी चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं भाजपा नेता कांग्रेस के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम और उससे अलग होकर बने दलों का उल्लेख करते हुए उनके आरोपों को चुनौती दे रहे हैं।