मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई हफ्तों की बाधा के बाद पहली बार Strait of Hormuz से एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर सफलतापूर्वक निकलने में कामयाब रहा है। यह घटना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह जलमार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस आपूर्ति मार्गों में से एक है।
शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, यह टैंकर Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) के दास द्वीप प्लांट से LNG लोड कर रवाना हुआ था। टैंकर “मुबाराज” कई हफ्तों तक फारस की खाड़ी में फंसा रहा, क्योंकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, टैंकर के ट्रांसमिशन सिग्नल 31 मार्च के आसपास बंद हो गए थे, जो आमतौर पर सुरक्षा कारणों से किया जाता है। हालांकि, जब यह भारत के दक्षिणी तट के करीब पहुंचा, तब इसके सिग्नल फिर से सक्रिय हुए। बताया जा रहा है कि यह जहाज अब China की ओर बढ़ रहा है और 15 मई तक अपने गंतव्य तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Strait of Hormuz से LNG टैंकर का गुजरना एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इस जलमार्ग से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात होता है। ऐसे में इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर डालती है।
गौरतलब है कि Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। ईरान ने कथित तौर पर हॉर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया था, जबकि अमेरिका ने भी ईरानी जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए थे। इस वजह से कतर और अन्य देशों से LNG लेकर जाने वाले कई जहाजों को बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा था।
हालांकि, हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के प्रयास भी जारी हैं। ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव दिया है, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट को खोलने की बात कही गई है। इसके बदले ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की पेशकश की, लेकिन अमेरिका ने फिलहाल इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।
ऊर्जा बाजार के लिहाज से यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है। यदि हॉर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही सामान्य होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल और गैस की आपूर्ति स्थिर हो सकती है और कीमतों में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है। खासकर एशियाई देशों के लिए यह मार्ग बेहद अहम है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी। अगर तनाव कम होता है और जहाजों की आवाजाही सामान्य होती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर होगी।