Sensex और Nifty 50 में मंगलवार को गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत हुई, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। बाजार खुलते ही निवेशकों में सतर्कता देखने को मिली, खासकर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में दबाव साफ नजर आया।
सुबह 9:17 बजे, सेंसेक्स 203 अंकों की गिरावट के साथ 77,099 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 50 भी 50 अंक फिसलकर 24,042 पर पहुंच गया। बाजार में इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा, जहां Nifty Bank में आधे प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई।
विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
दूसरी ओर, सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी फार्मा, फाइनेंशियल सर्विसेज, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर में गिरावट देखी गई। हालांकि, कुछ सेक्टर जैसे एनर्जी, ऑटो, मेटल और इंफ्रास्ट्रक्चर में सीमित बढ़त देखने को मिली, जिससे बाजार को थोड़ी राहत जरूर मिली।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में हल्की मजबूती दर्ज की गई। Nifty Midcap 100 में 0.26 प्रतिशत की तेजी देखी गई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स भी हरे निशान में कारोबार करता दिखा। यह संकेत देता है कि निवेशक बड़े शेयरों से निकलकर छोटे और मध्यम कंपनियों की ओर रुख कर रहे हैं।
वैश्विक बाजारों का भी भारतीय शेयर बाजार पर असर पड़ा है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी बाजारों में भी सीमित उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं।
कच्चे तेल की कीमतों की बात करें तो Brent Crude लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। तेल की कीमतों में यह उछाल अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के कारण देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और परमाणु समझौते को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार में अस्थिरता बढ़ाई है। निवेशकों को डर है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं, जिससे शेयर बाजार पर दबाव और बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है, खासकर बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में।