नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हाल के दिनों में सामने आई राजनीतिक उठापटक और नेताओं के पार्टी छोड़ने की घटनाओं पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को ममता बनर्जी ने राजनीतिक पहचान दिलाई, महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं और ऊंचे पदों तक पहुंचाया, वही आज पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं।
रामगोपाल यादव ने कहा कि कई नेताओं को तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा और लोकसभा तक पहुंचाया, कुछ को मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिली, लेकिन सत्ता और राजनीतिक परिस्थितियां बदलते ही उन्होंने पार्टी से दूरी बना ली। उनके अनुसार, यह राजनीतिक निष्ठा और वैचारिक प्रतिबद्धता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल केवल व्यक्तियों से नहीं चलते, बल्कि विचारधारा, संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत से आगे बढ़ते हैं। किसी भी पार्टी में नेताओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन इससे संगठन की मूल ताकत खत्म नहीं होती। उन्होंने विश्वास जताया कि तृणमूल कांग्रेस आगे भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी।
रामगोपाल यादव ने उन नेताओं पर भी निशाना साधा जिन्होंने हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी छोड़ने का फैसला किया। उनका कहना था कि जिन लोगों को संगठन ने अवसर दिए, वे कठिन समय में साथ छोड़कर चले गए। ऐसे नेताओं का भविष्य जनता और राजनीतिक परिस्थितियां तय करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि देश की राजनीति इस समय महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संविधान की रक्षा सबसे बड़ा मुद्दा होना चाहिए। उनके मुताबिक विपक्षी दलों को जनता से जुड़े मुद्दों पर एकजुट होकर काम करना चाहिए।
टीएमसी में हाल के दिनों में कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के पार्टी छोड़ने की खबरों के बीच रामगोपाल यादव का यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का असर राष्ट्रीय स्तर पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से लगातार यह दावा किया जा रहा है कि संगठन मजबूत है और पार्टी अपने कार्यकर्ताओं तथा जनाधार के बल पर आगे बढ़ती रहेगी। वहीं विपक्षी दलों के बयान इस राजनीतिक घटनाक्रम को और चर्चा में ला रहे हैं। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति किस दिशा में जाएगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा, लेकिन फिलहाल टीएमसी में जारी हलचल राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बनी हुई है।