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निवेश नहीं, फिर कैसी ग्रोथ?

भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन  ने कहा है कि आधिकारिक तौर पर दर्ज की जा रही 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि और जमीनी आर्थिक गतिविधियों के बीच अंतर दिखाई देता है। उनका मानना है कि […]

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Gauravshali Bharat News
  • June 13, 2026 10:27 am IST, Published 2 hours ago

भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन  ने कहा है कि आधिकारिक तौर पर दर्ज की जा रही 7 प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि और जमीनी आर्थिक गतिविधियों के बीच अंतर दिखाई देता है। उनका मानना है कि यदि अर्थव्यवस्था वास्तव में इतनी तेज गति से बढ़ रही है, तो इसका असर निजी निवेश, उद्योगों के विस्तार और रोजगार सृजन में भी स्पष्ट रूप से नजर आना चाहिए।

राजन ने कहा कि पिछले कई वर्षों से निजी क्षेत्र का निवेश अपेक्षित गति से नहीं बढ़ा है। इसके साथ ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के आंकड़ों में भी कमजोरी देखी गई है। उनका तर्क है कि विदेशी कंपनियों द्वारा नई उत्पादन इकाइयों और विनिर्माण परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश नहीं दिख रहा, जिससे आर्थिक वृद्धि के दावों पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियां भारत की अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि का असर महंगाई, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

पूर्व गवर्नर के अनुसार, भारत को विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए दीर्घकालिक और स्पष्ट आर्थिक रणनीति की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि केवल विकास दर के आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय निवेश, रोजगार, आय वृद्धि और उत्पादकता जैसे संकेतकों पर भी समान ध्यान दिया जाना चाहिए।

 

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