लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधान परिषद की खाली हो रही 11 सीटों को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। इन सीटों पर चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच तैयारियां शुरू हो गई हैं। चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना के बाद 27 अक्टूबर को नतीजे सामने आएंगे। इस चुनाव के जरिए विधान परिषद में रिक्त होने वाली सीटों पर नए सदस्यों का निर्वाचन किया जाएगा।
चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, विधान परिषद की इन सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी सहित अन्य चुनावी प्रक्रियाएं निर्धारित कार्यक्रम के तहत पूरी की जाएंगी। निर्वाचन आयोग राज्य विधान परिषद के चुनावों के लिए नामांकन से लेकर मतदान और मतगणना तक की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित करता है।
इन 11 सीटों का चुनाव उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए विधान परिषद में विभिन्न दलों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्षी पार्टियां अपने-अपने स्तर पर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर सकती हैं। उम्मीदवारों के चयन में पार्टी की संगठनात्मक रणनीति, राजनीतिक समीकरण और विधान परिषद में भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जाना तय माना जा रहा है।
जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, उनमें अवनीश कुमार सिंह, आशुतोष सिन्हा, मानवेंद्र प्रताप सिंह और दिनेश गोयल के नाम शामिल हैं। इनके अलावा मान सिंह यादव, उमेश द्विवेदी, लाल बिहारी यादव, आकाश अग्रवाल, हरि सिंह ढिल्लो, ध्रुव कुमार त्रिपाठी और श्रीचंद्र शर्मा का कार्यकाल भी पूरा होने जा रहा है। इन सदस्यों की सीटों पर चुनाव होने के बाद परिषद में नए चेहरों को जगह मिलेगी।
विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से अलग होती है। राज्य विधान परिषद की सीटों के चुनाव के लिए निर्वाचन की संबंधित श्रेणी के अनुसार निर्वाचक मंडल निर्धारित होता है। ऐसे चुनावों में नामांकन, जांच, नाम वापसी और मतदान की प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत होती है। आयोग राज्य विधान परिषद चुनावों के लिए उम्मीदवारों से जुड़े नामांकन दस्तावेज और चुनावी प्रक्रिया को निर्धारित प्रारूपों के माध्यम से संचालित करता है।
उत्तर प्रदेश में इन 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बैठकों का दौर भी तेज होने की संभावना है। दल संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा करने के साथ-साथ यह भी देखेंगे कि विधान परिषद में उनका प्रतिनिधित्व किस तरह मजबूत किया जा सकता है। टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर दावेदारों की सक्रियता बढ़ सकती है। लंबे समय से संगठन में काम कर रहे नेताओं के अलावा अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों से जुड़े चेहरों के नाम भी चर्चा में आ सकते हैं।
विधान परिषद में संख्या बल किसी भी दल के लिए विधायी कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में रिक्त हो रही सीटों के चुनाव को केवल खाली पदों को भरने की प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे परिषद में राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि चुनाव के बाद किस दल की स्थिति में कितना बदलाव आएगा, यह उम्मीदवारों के चयन, निर्वाचक मंडल के समर्थन और मतदान के परिणाम पर निर्भर करेगा।
नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर होने के कारण आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नामों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। इसके बाद चुनावी मुकाबले में शामिल उम्मीदवारों की स्थिति सामने आएगी और राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर रणनीति को अंतिम रूप देंगे। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद इन 11 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद के इन चुनावों पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषकों की भी नजर रहेगी। चुनाव परिणाम यह बताएंगे कि रिक्त हुई सीटों पर कौन से उम्मीदवार निर्वाचित होते हैं और इसके बाद विधान परिषद के भीतर विभिन्न दलों की स्थिति किस तरह बदलती है। फिलहाल अधिसूचना जारी होने के साथ ही चुनावी गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है और आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नामों तथा दलों की रणनीति को लेकर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।