आरा/भोजपुर । बिहार के भोजपुर और दानापुर रेल क्षेत्र में यात्रियों को कथित तौर पर निशाना बनाने के मामलों की जांच कर रही रेल पुलिस को एक अहम सफलता मिली है। यात्रियों से सामान छीनने और विरोध करने पर उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंकने के आरोपों से जुड़े रोहित तिवारी को आरपीएफ और जीआरपी की संयुक्त टीम ने प्रयागराज से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम उसे पूछताछ के लिए पटना लेकर लौट रही है।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी की गतिविधियों का दायरा केवल एक रेलवे स्टेशन या एक ट्रेन तक सीमित नहीं था। जांच का फोकस दानापुर रेल मंडल के पटना से आरा, बक्सर और डीडीयू की दिशा में जाने वाले रेलखंडों के साथ आगे के क्षेत्रों तक बताया जा रहा है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि आरोपी की कथित भूमिका कितनी घटनाओं में रही और क्या इन मामलों में कोई अन्य व्यक्ति भी उसके साथ शामिल था।
प्रयागराज में तकनीकी सुराग से मिला आरोपी
रोहित तिवारी की गिरफ्तारी के लिए जीआरपी पटना, जीआरपी दानापुर और आरपीएफ आरा की संयुक्त टीम गठित की गई थी। पुलिस के अनुसार, तकनीकी जानकारी और लोकेशन से मिले सुरागों के आधार पर आरोपी के प्रयागराज क्षेत्र में मौजूद होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने प्रयागराज पहुंचकर कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी को लेकर पटना के लिए रवाना हुई। अब रेल पुलिस उससे विस्तार से पूछताछ करेगी। जांच अधिकारियों की कोशिश होगी कि पुराने मामलों के साथ-साथ हाल में हुई घटनाओं के बीच संभावित कड़ियों को भी जोड़ा जा सके।
यात्रियों को निशाना बनाने का आरोप
पुलिस के अनुसार, रोहित तिवारी पर आरोप है कि वह ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों को निशाना बनाता था। आरोप है कि पहले वह यात्रियों का सामान छीनता और इसके बाद विरोध करने वाले यात्री को ट्रेन के गेट की ओर ले जाकर बाहर फेंक देता था।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि आरोपी कथित तौर पर खुद को पुलिस या सुरक्षा एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताकर यात्रियों पर दबाव बनाने की कोशिश करता था। हालांकि इन आरोपों की विस्तृत पुष्टि और घटनाओं में उसकी भूमिका का निर्धारण पुलिस की पूछताछ और आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस द्वारा आरोपी के कथित तौर-तरीके को लेकर उसे मीडिया रिपोर्टों में ‘साइको किलर’ कहा जा रहा है। यह कोई न्यायिक निष्कर्ष नहीं है, बल्कि पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों में इस्तेमाल किया गया वर्णन है। फिलहाल उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
दानापुर रेल क्षेत्र की घटनाओं से जुड़ रही कड़ियां
रेल पुलिस की जांच में दानापुर क्षेत्र में सामने आई घटनाएं भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। हाल के मामलों के बाद पुलिस और आरपीएफ ने संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई थी। इसी दौरान संदिग्ध की गतिविधियों से जुड़े तकनीकी सुराग सामने आए, जिनके आधार पर उसकी लोकेशन प्रयागराज तक ट्रेस की गई।
पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किन ट्रेनों में सवार होता था, यात्रियों को किस तरह चुनता था और कथित रूप से छीने गए सामान का क्या किया जाता था। इसके अलावा पुराने रेल अपराधों में दर्ज मामलों की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है।
कई रेलखंडों पर जांच का दायरा बढ़ा
जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग घटनाओं को एक-दूसरे से जोड़ना है। ऐसे मामलों में यदि चोरी या लूट का सामान बरामद नहीं होता, तो किसी संदिग्ध की भूमिका साबित करने के लिए तकनीकी साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध जानकारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुलिस अब रोहित तिवारी से पूछताछ के जरिए यह जानने का प्रयास करेगी कि वह किन-किन स्थानों पर सक्रिय रहा। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या उसके संपर्क में कोई अन्य व्यक्ति था या घटनाओं को अंजाम देने में किसी दूसरे व्यक्ति ने उसकी मदद की थी।
इससे पहले भी पुलिस ने आरोपी की तलाश के दौरान उसके मोबाइल और गतिविधियों से जुड़े तकनीकी सुरागों का इस्तेमाल किया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, पटना जंक्शन क्षेत्र में पुलिस की पकड़ से बचने के दौरान उसका मोबाइल बरामद हुआ था और सीसीटीवी फुटेज के जरिए भी उसकी गतिविधियों की जांच की गई थी।
पूछताछ के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
रोहित तिवारी की गिरफ्तारी के बाद अब रेल पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। इनमें कथित घटनाओं की वास्तविक संख्या, अलग-अलग मामलों में उसकी भूमिका, यात्रियों से छीने गए सामान का पता और संभावित सहयोगियों की जानकारी शामिल है।
पुलिस उसे पटना लाने के बाद पुराने और हालिया मामलों के संबंध में पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगी कि आरोपी किन परिस्थितियों में कथित वारदातों को अंजाम देता था और अलग-अलग घटनाओं के बीच क्या समानता है।
फिलहाल गिरफ्तारी को जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन आरोपी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली कानूनी प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। पुलिस की पूछताछ के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रोहित तिवारी की कथित भूमिका कितनी घटनाओं में रही है और किन मामलों में उसके खिलाफ आगे कार्रवाई की जाएगी।