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प्रियंका गांधी ने मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग पर कार्रवाई मांगी

विपक्षी दल मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं

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Gauravshali Bharat News
  • September 25, 2026 3:38 pm IST, Published 53 minutes ago

नई दिल्ली:  कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से बाहर किए गए हैं। प्रियंका गांधी ने चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह के हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई।

प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया या मतदाता सूची में जानबूझकर छेड़छाड़ की जाती है तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर अपराध है। उन्होंने चुनाव आयोग के प्रमुख अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कथित अनियमितताओं की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। उनके बयान के मुताबिक, मतदाता सूची में बदलाव केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है।

यह पूरा विवाद चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे SIR अभियान को लेकर सामने आया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों की समीक्षा करना और उनमें मौजूद विसंगतियों को दूर करना बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम बाहर किए गए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच मतभेद सामने आए हैं।


प्रियंका गांधी का कहना है कि उनके भाई और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे से संबंधित आंकड़े और दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नामों के बाहर होने के तथ्य को केवल राजनीतिक आरोप कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। शुक्रवार को उन्होंने भाजपा की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले में उपलब्ध तथ्यों और प्रमाणों पर चर्चा होनी चाहिए।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया के तहत होने वाली कवायद के रूप में देखता है। दिल्ली में SIR को लेकर चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अर्थ नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जाता है। अंतिम निर्णय निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध जानकारी के आधार पर लिया जाता है।

दिल्ली में SIR के दौरान कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों को भी विसंगतियों से जुड़े नोटिस जारी किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे नोटिस का उद्देश्य मतदाता विवरण की जांच करना है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता को जवाब देने का अवसर दिया जाता है और आदेश के खिलाफ अपील की प्रक्रिया उपलब्ध रहती है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। विपक्षी दल मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपनी निर्धारित प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने की बात कह रहा है। ऐसे में विवाद का एक प्रमुख केंद्र यह है कि ड्राफ्ट सूची से बाहर किए गए नामों में कितने मामले वास्तविक रूप से गलत, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं से जुड़े हैं और कितने मामलों में वैध मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल करने की जरूरत है।

प्रियंका गांधी ने अपने बयान में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की रक्षा को लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनके बयान में इस्तेमाल किए गए “देशद्रोह” जैसे शब्द उनके राजनीतिक आरोप और रुख को दर्शाते हैं; इन्हें स्थापित कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

फिलहाल SIR और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक तथा सार्वजनिक बहस जारी है। आगे की प्रक्रिया में दावों और आपत्तियों की जांच तथा संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का अवसर महत्वपूर्ण होगा। अंतिम मतदाता सूची और आधिकारिक सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने नाम स्थायी रूप से हटे, कितने दोबारा जोड़े गए और कितने मामलों में रिकॉर्ड संबंधी सुधार किए गए।

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