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रोहतास में सॉस फैक्ट्री का चौंकाने वाला सच, छापे में खुली पोल

बिहार के डेहरी ऑन सोन में सॉस फैक्ट्री पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, गंदगी और संदिग्ध केमिकल मिलने के बाद फैक्ट्री सील; खाद्य पदार्थों के नमूनों की प्रयोगशाला में होगी जांच।

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Gauravshali Bharat News
  • September 25, 2026 11:18 pm IST, Published 1 minute ago

रोहतास। बिहार के रोहतास जिले के डेहरी ऑन सोन में सॉस बनाने वाली एक फैक्ट्री पर प्रशासन की छापेमारी के दौरान खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर मामला सामने आया है। फैक्ट्री परिसर में गंदगी, कीड़े-मकोड़े और संदिग्ध रसायन मिलने के बाद प्रशासन ने निर्माण इकाई को सील कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री में चिली सॉस बनाने की अनुमति भी नहीं थी। इस कार्रवाई के बाद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एसडीएम के नेतृत्व में हुई छापेमारी

मामला डेहरी ऑन सोन नगर थाना क्षेत्र के एनिकट टॉल बांस के समीप स्थित सॉस निर्माण इकाई का है। 22 सितंबर को अनुमंडल पदाधिकारी निलेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों को परिसर में साफ-सफाई की गंभीर कमी दिखाई दी। सॉस बनाने के लिए रखी सामग्री और निर्माण प्रक्रिया की पड़ताल में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फैक्ट्री को तत्काल सील कर दिया। खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच के लिए सॉस के नमूने एकत्र किए हैं।

गंदगी और संदिग्ध केमिकल मिलने से बढ़ी चिंता

छापेमारी के दौरान फैक्ट्री परिसर में संदिग्ध रसायन, गंदी बोतलें और अस्वच्छ परिस्थितियां मिलने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक, सॉस निर्माण में इस्तेमाल की जा रही कुछ सामग्रियों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कीड़े-मकोड़े भी पाए गए। ऐसी परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ तैयार करना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।हालांकि, बरामद रसायनों की वास्तविक प्रकृति और उनके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों की पुष्टि प्रयोगशाला की जांच के आधार पर ही की जा सकेगी।

200 किलो सड़ा टमाटर पल्प और एक्सपायरी सॉस

इस कार्रवाई से जुड़ी अन्य रिपोर्टों में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान बड़ी मात्रा में खराब सामग्री मिलने का विवरण सामने आया है।

जांच में सामने आई सामग्री

| सड़ा हुआ टमाटर पल्प | 200 किलोग्राम |

| खराब आलू मैश पल्प | 35 किलोग्राम |

| एक्सपायरी चिली सॉस | 240 बोतल |

| एक्सपायरी टोमैटो सॉस | 120 बोतल |

22 सितंबर को प्रकाशित खाद्य सुरक्षा अभियान संबंधी रिपोर्ट में दर्ज विवरण। रिपोर्ट के अनुसार, खराब खाद्य सामग्री को निर्धारित प्रक्रिया के तहत नष्ट कराया गया, ताकि उसका दोबारा इस्तेमाल या बाजार में वितरण न हो सके।

लाइसेंस में नहीं थी चिली सॉस बनाने की अनुमति

प्रशासनिक जांच में एक महत्वपूर्ण अनियमितता फैक्ट्री के लाइसेंस से जुड़ी सामने आई। एसडीएम निलेश कुमार के अनुसार, संचालक की ओर से प्रस्तुत लाइसेंस में चिली सॉस बनाने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद परिसर में इसका उत्पादन किया जा रहा था। अधिकारियों ने टोमैटो और चिली सॉस की पैकिंग के लिए रखी पुरानी तथा गंदी बोतलों पर भी आपत्ति जताई। फैक्ट्री को सील करने के साथ आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर किए जाने की बात कही गई है।

उपभोक्ताओं की सेहत के लिए क्यों गंभीर है मामला?

सॉस का इस्तेमाल घरों के अलावा होटल, रेस्टोरेंट, चाट और फास्ट फूड की दुकानों पर बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में खाद्य पदार्थों के निर्माण के दौरान स्वच्छता की अनदेखी कई उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकती है। खराब कच्चा माल, दूषित पानी, अस्वच्छ उपकरण और अनुचित भंडारण से तैयार खाद्य पदार्थों में हानिकारक सूक्ष्मजीव पनप सकते हैं। इससे पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, डेहरी की संबंधित फैक्ट्री में मिले रसायनों से किसी विशेष बीमारी के होने का दावा प्रयोगशाला की पुष्टि के बिना नहीं किया जा सकता।

बिहार के अन्य जिलों में भी खाद्य सुरक्षा अभियान

डेहरी की कार्रवाई बिहार में चलाए गए व्यापक खाद्य सुरक्षा निरीक्षण अभियान का हिस्सा बताई गई है। 22 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, गया, वैशाली, सीतामढ़ी, सारण, रोहतास, लखीसराय, सहरसा, शेखपुरा और अरवल सहित नौ जिलों के 19 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। इस दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए। कई स्थानों पर खराब और एक्सपायरी सामग्री मिलने पर उसे नष्ट कराने की कार्रवाई भी हुई।

बाजार में बिकने वाले सॉस की गुणवत्ता पर सवाल

डेहरी में सामने आए मामले ने खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और बिक्री की निगरानी का महत्व उजागर किया है। विशेष रूप से खुले बाजार में बिकने वाले सॉस, चटनी और अन्य पैक्ड खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना आवश्यक है। खुदरा विक्रेताओं को भी उत्पाद खरीदते समय निर्माता का विवरण, लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जांच करनी चाहिए। उपभोक्ताओं को ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए जिनकी पैकिंग क्षतिग्रस्त हो, जिनसे असामान्य दुर्गंध आती हो या जिनके निर्माण संबंधी विवरण स्पष्ट न हों।

जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब प्रयोगशाला की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इससे सॉस के नमूनों की गुणवत्ता और संदिग्ध रसायनों से संबंधित स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों ने जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में फैक्ट्री को सील किए जाने की पुष्टि हुई है। यह मामला खाद्य निर्माण इकाइयों में नियमित निरीक्षण, स्वच्छता और लाइसेंस संबंधी नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य पदार्थ पहुंचाने के लिए निर्माण से लेकर बिक्री तक प्रभावी निगरानी जरूरी है।

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