• होम
  • महाराष्ट्र
  • महाराष्ट्र के 75 फीसदी हिस्से पर सूखे का असर, सरकार ने राहत उपाय घोषित किए

महाराष्ट्र के 75 फीसदी हिस्से पर सूखे का असर, सरकार ने राहत उपाय घोषित किए

सरकार की ओर से प्रभावित किसानों और जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही पशुधन को बचाने के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया..

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 26, 2026 2:50 pm IST, Published 12 hours ago

महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने 265 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। सरकार के इस फैसले के बाद प्रभावित किसानों और ग्रामीण आबादी के लिए राहत उपायों की घोषणा की गई है। राज्य के बड़े हिस्से में सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में राहत और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की ओर से घोषित राहत उपायों में किसानों को भूमि राजस्व में छूट देने का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा फसल ऋण के पुनर्गठन और कृषि ऋण की वसूली पर रोक जैसे कदम उठाए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य सूखे के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे किसानों को तत्काल राहत देना और उन्हें मौजूदा कृषि चक्र में सहायता उपलब्ध कराना है।

सूखे से प्रभावित किसानों के लिए कृषि पंपों के बिजली बिल में भी राहत देने का फैसला किया गया है। पानी की कमी के कारण खेती और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहे असर को देखते हुए बिजली बिल में छूट किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखी जा रही है। संबंधित विभागों को इन उपायों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

सूखे का असर ग्रामीण परिवारों के साथ विद्यार्थियों पर भी पड़ने की आशंका को देखते हुए छात्रों की परीक्षा फीस में छूट देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा रोजगार की जरूरत वाले क्षेत्रों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के तहत अतिरिक्त काम उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय का साधन उपलब्ध कराना है।

पानी की समस्या से निपटने के लिए जरूरत वाले इलाकों में टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जाएगी। प्रशासन को ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर वहां नियमित रूप से पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने को कहा गया है। सूखे के दौरान ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए सरकार ने पानी की आपूर्ति को प्राथमिकता वाले कार्यों में शामिल किया है। सरकार की ओर से प्रभावित किसानों और जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही पशुधन को बचाने के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। सूखे की स्थिति में खेतों के साथ पशुपालन पर भी असर पड़ता है, ऐसे में चारा उपलब्ध कराना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राज्य सरकार ने सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं। स्थानीय स्तर पर जलस्रोतों के संरक्षण और उपलब्ध पानी के बेहतर इस्तेमाल के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत काम तेज किया जाएगा। सरकार का जोर ऐसे कार्यों पर है, जिनसे मौजूदा संकट के साथ-साथ भविष्य में पानी की उपलब्धता को भी बेहतर किया जा सके। प्रभावित क्षेत्रों में पंचनामा प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। पंचनामा के माध्यम से फसल और सूखे से हुए नुकसान का आकलन किया जाता है, जिसके आधार पर प्रभावित किसानों को राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। सरकार ने अधिकारियों से इस प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा है ताकि पात्र लाभार्थियों तक राहत समय पर पहुंच सके।

सूखे की घोषणा के बाद जिला और तहसील स्तर पर प्रशासन की भूमिका बढ़ गई है। स्थानीय अधिकारियों को क्षेत्र की जरूरत के अनुसार पेयजल, रोजगार, चारा और खाद्यान्न जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही किसानों की समस्याओं और फसल नुकसान से जुड़े मामलों पर भी निगरानी रखी जाएगी। महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति ने खेती, ग्रामीण रोजगार, पेयजल और पशुधन से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। सरकार की ओर से घोषित राहत उपायों का उद्देश्य तत्काल जरूरतों को पूरा करने के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है। अब इन घोषणाओं को जमीन पर लागू करना प्रशासन के लिए प्रमुख चुनौती होगी। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की गति और सरकारी योजनाओं के वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने से स्थिति पर आगे असर पड़ेगा।

 

Advertisement