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शमी के चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा, हसीन जहां ने भी खोला मोर्चा

अमरोहा सदर सीट को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बढ़ी हुई हैं। शमी का नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में उनके प्रभाव, लोकप्रियता और क्षेत्र से जुड़ाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

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Gauravshali Bharat News
  • September 27, 2026 2:00 pm IST, Published 2 hours ago

उत्तर प्रदेश की अमरोहा सदर विधानसभा सीट इन दिनों क्रिकेट और राजनीति से जुड़े दो चर्चित नामों को लेकर सुर्खियों में है। क्रिकेटर मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी से हालिया मुलाकात के बाद उनके राजनीति में उतरने की अटकलें तेज हुई हैं। इसी बीच उनकी पत्नी हसीन जहां ने भी संकेत दिया है कि यदि शमी या उनके परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में उतरता है, तो वह भी उसी सीट से चुनाव लड़ेंगी। इससे अमरोहा की स्थानीय राजनीति में एक नया राजनीतिक समीकरण चर्चा में आ गया है।

मोहम्मद शमी मूल रूप से अमरोहा के सहसपुर अलीनगर गांव से जुड़े हैं। जयंत चौधरी के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हुई कि वह आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अमरोहा सदर सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में शमी के बड़े भाई मोहम्मद हसीब के नाम की भी संभावित उम्मीदवार के तौर पर चर्चा की गई है। हालांकि, अब तक शमी, उनके परिवार या राष्ट्रीय लोक दल की ओर से उनकी उम्मीदवारी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

जयंत चौधरी से मुलाकात ने इसलिए भी राजनीतिक दिलचस्पी पैदा की है क्योंकि अमरोहा शमी का गृह क्षेत्र है। क्रिकेट के मैदान पर अपनी पहचान बनाने वाले शमी यदि सक्रिय राजनीति में कदम रखते हैं तो यह उनके सार्वजनिक जीवन की एक नई दिशा होगी। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि जयंत चौधरी और शमी की मुलाकात चुनावी राजनीति को लेकर थी या सामान्य मुलाकात का हिस्सा थी। उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों संभावनाओं पर चर्चा है।

इसी बीच हसीन जहां के बयान ने पूरे घटनाक्रम को और चर्चा में ला दिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि शमी या उनके भाई हसीब उस सीट से चुनाव लड़ते हैं तो वह भी उनके सामने चुनाव मैदान में उतरेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी राजनीतिक दल से टिकट नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का विकल्प उनके पास रहेगा। हालांकि, अभी तक किसी पार्टी ने हसीन जहां को उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा नहीं की है।

शमी और हसीन जहां के बीच 2018 से पारिवारिक विवाद सार्वजनिक चर्चा का विषय रहा है। दोनों लंबे समय से अलग रह रहे हैं और उनके बीच विवाद से जुड़े मामले भी सामने आते रहे हैं। अब उसी पारिवारिक पृष्ठभूमि का संदर्भ संभावित चुनावी मुकाबले की चर्चाओं में भी दिखाई देने लगा है। हालांकि, राजनीतिक रूप से दोनों की संभावित उम्मीदवारी और व्यक्तिगत विवाद को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी होगा।

अमरोहा सदर सीट को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बढ़ी हुई हैं। शमी का नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में उनके प्रभाव, लोकप्रियता और क्षेत्र से जुड़ाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दूसरी तरफ हसीन जहां के चुनाव लड़ने के बयान ने संभावित मुकाबले को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।

फिलहाल पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी पक्ष की औपचारिक उम्मीदवारी सामने नहीं आई है। शमी के राजनीति में आने की चर्चा जयंत चौधरी से उनकी मुलाकात के बाद शुरू हुई, जबकि हसीन जहां ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि शमी या उनके परिवार के सदस्य के चुनाव लड़ने की स्थिति में वह भी मुकाबले में उतरेंगी।

आने वाले समय में यदि शमी या उनके भाई हसीब चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं और RLD की ओर से टिकट की घोषणा होती है, तो अमरोहा सदर की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है। वहीं हसीन जहां की ओर से भी उम्मीदवारी का अंतिम फैसला सामने आने पर मुकाबले की तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल अमरोहा में राजनीति की चर्चा क्रिकेटर शमी, जयंत चौधरी की मुलाकात और हसीन जहां के चुनावी ऐलान के इर्द-गिर्द घूम रही है।

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