• होम
  • दिल्ली/NCR
  • दिल्ली में प्रदूषण रोकने को मिशन मोड में लागू होगा नो PUC, नो Fuel

दिल्ली में प्रदूषण रोकने को मिशन मोड में लागू होगा नो PUC, नो Fuel

प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों के दौरान विशेष चिंता सामने आती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियां और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण इसके प्रमुख स्रोतों में शामिल बताए जाते हैं। ऐसे में सरकार की रणनीति में परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़कों के रखरखाव जैसे...

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • September 28, 2026 5:30 pm IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कई स्तरों पर कार्रवाई तेज करने की तैयारी की है। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण को लेकर हुई एक विस्तृत बैठक में वाहनों, सार्वजनिक परिवहन और सड़कों से जुड़े उपायों पर चर्चा की गई। सरकार का जोर ऐसे कदमों पर है, जिनसे राजधानी में प्रदूषण के स्रोतों को नियंत्रित करने के साथ लोगों को सार्वजनिक परिवहन की ओर प्रोत्साहित किया जा सके।

सिरसा के मुताबिक, दिल्ली में ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था को मिशन मोड में लागू किया जाएगा। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसी के बिना वाहनों को ईंधन देने पर रोक से जुड़ी व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाना और वाहन मालिकों को प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र समय पर बनवाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने को भी प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति का अहम हिस्सा बनाया है। मंत्री ने कहा कि लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी क्रम में दिल्ली मेट्रो से जुड़ी सुविधाओं और कनेक्टिविटी की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए ‘सारथी’ ऐप के प्रचार को मिशन मोड में आगे बढ़ाने की योजना है। इसका उद्देश्य मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक परिवहन विकल्पों को लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाना है।

दिल्ली सरकार का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन की पहुंच और उपयोग बढ़ने से सड़कों पर निजी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही मेट्रो नेटवर्क और अन्य परिवहन साधनों के बीच बेहतर संपर्क विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सड़कों के पुनर्विकास और निर्माण को लेकर भी सरकार ने प्रगति के आंकड़े साझा किए हैं। मंत्री के अनुसार, वर्ष 2026 के दौरान दिल्ली में कुल 3,065 किलोमीटर सड़कों के पुनर्निर्माण का लक्ष्य रखा गया था। 20 सितंबर तक करीब 1,193 किलोमीटर सड़क का काम पूरा हो चुका है। सरकार के मुताबिक, बाकी सड़कों पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है।

प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों के दौरान विशेष चिंता सामने आती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियां और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण इसके प्रमुख स्रोतों में शामिल बताए जाते हैं। ऐसे में सरकार की रणनीति में परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़कों के रखरखाव जैसे उपायों को भी जोड़ा गया है।

‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नीति को मिशन मोड में लागू करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के साथ सरकार का फोकस सड़कों के पुनर्विकास पर भी है। आने वाले समय में इन योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके वास्तविक प्रभाव पर नजर रहेगी। प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिल्ली और एनसीआर के अलग-अलग हिस्सों में उठाए जाने वाले कदमों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण रहेगा।

 

Advertisement