गुजरात की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला की संभावित कांग्रेस वापसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि विपक्षी दलों और नेताओं को एकजुट करने के प्रयास चल रहे हैं। इसी क्रम में वाघेला के साथ कांग्रेस में दोबारा जुड़ने को लेकर बातचीत की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनके औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल होने की अंतिम तारीख या कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
अहमदाबाद में कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने वाघेला के संभावित राजनीतिक पुनर्मिलन को लेकर बात रखी। चावड़ा के मुताबिक, वाघेला लंबे समय से भाजपा की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए संविधान और लोकतांत्रिक मुद्दों पर समान विचार रखने वाली राजनीतिक ताकतों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि पार्टी के साथ अलग-अलग राजनीतिक नेताओं और समूहों की बातचीत चल रही है। उनके अनुसार, गुजरात में कांग्रेस खुद को भाजपा के सामने एक राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की तैयारी कर रही है। वाघेला के कांग्रेस के साथ संभावित जुड़ाव को भी इसी व्यापक राजनीतिक कवायद से जोड़कर देखा जा रहा है। ये कांग्रेस नेताओं द्वारा व्यक्त राजनीतिक दावे हैं।
वहीं, शंकरसिंह वाघेला ने भी कांग्रेस में लौटने की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि कांग्रेस में वापसी को लेकर चर्चा चल रही है। उनके अनुसार, नवरात्रि से पहले कांग्रेस में शामिल होने की संभावना है। हालांकि, अंतिम निर्णय और औपचारिक घोषणा पार्टी तथा वाघेला की ओर से होना बाकी है। शंकरसिंह वाघेला का गुजरात की राजनीति में लंबा और उतार-चढ़ाव भरा राजनीतिक सफर रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर की थी।
इसके बाद वे भारतीय जनसंघ और भाजपा की राजनीति में सक्रिय हुए। 1977 में कपड़वंज लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर उन्होंने पहली बार संसद में प्रवेश किया। 1990 के दशक में भाजपा के भीतर मतभेदों के बाद वाघेला ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया। उन्होंने राष्ट्रीय जनता पार्टी का गठन किया और 1996 में कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने। हालांकि, उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल करीब एक वर्ष रहा। इसके बाद उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया और वाघेला कांग्रेस के साथ आ गए।
केंद्र की राजनीति में भी वाघेला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 2004 से 2009 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में उन्होंने केंद्रीय कपड़ा मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वे गुजरात की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। 2017 में राज्यसभा चुनाव के दौरान वाघेला ने कांग्रेस से दूरी बना ली। इसके बाद उन्होंने जन विकल्प मोर्चा के जरिए अलग राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश की।
2019 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थामा और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने NCP से भी इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वाघेला ने अपनी अलग राजनीतिक गतिविधियां जारी रखीं। 2024 में उन्होंने प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी के गठन की घोषणा की। अब कांग्रेस में संभावित वापसी की चर्चा ने उनके राजनीतिक सफर के एक और नए अध्याय की संभावना पैदा कर दी है।
गुजरात विधानसभा चुनाव 2027 को अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने संगठन को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक समूहों के साथ संपर्क बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ऐसे में वाघेला जैसे अनुभवी नेता की संभावित वापसी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा होना स्वाभाविक है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि कांग्रेस और वाघेला के बीच चल रही बातचीत किस निष्कर्ष तक पहुंचती है और क्या नवरात्रि से पहले उनके कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल होने की घोषणा होती है।