• होम
  • दिल्ली/NCR
  • जंतर-मंतर पर घमासान: इंटरनेट बंद, 12 मेट्रो स्टेशन भी बंद

जंतर-मंतर पर घमासान: इंटरनेट बंद, 12 मेट्रो स्टेशन भी बंद

राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास राजनीतिक प्रदर्शन के चलते सुरक्षा व्यवस्था अचानक बेहद कड़ी कर दी गई।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 3, 2026 9:39 am IST, Published 2 hours ago

नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास राजनीतिक प्रदर्शन के चलते सुरक्षा व्यवस्था अचानक बेहद कड़ी कर दी गई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बीच मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहीं और दिल्ली मेट्रो के 12 स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के लिए कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई।

जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोका गया

शुक्रवार को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़े। प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं, वामपंथी छात्र संगठनों और अन्य समूहों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की थी। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर उठाए जा रहे सवालों से जुड़ी है।

दिल्ली पुलिस की ओर से प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दिए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। पुलिस और सुरक्षा बलों ने कई मार्गों पर बैरिकेड लगाए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।

12 मेट्रो स्टेशनों पर बंद रहे प्रवेश और निकास

प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने 12 स्टेशनों के प्रवेश और निकास को अस्थायी रूप से बंद किया। प्रभावित स्टेशनों में राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, जनपथ, पटेल चौक, मंडी हाउस, सेवा तीर्थ, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, नई दिल्ली और बाराखंभा रोड शामिल रहे। हालांकि कुछ स्टेशनों पर यात्रियों के लिए इंटरचेंज की सुविधा उपलब्ध रहने की जानकारी दी गई।

मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश-निकास बंद होने से केंद्रीय दिल्ली में आने-जाने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुरक्षा व्यवस्था सामान्य होने के बाद स्टेशनों को फिर से खोल दिया गया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कई स्टेशनों को लगभग रात 8:20 बजे के आसपास फिर से खोल दिया गया था।

मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवा प्रभावित

प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केंद्रीय दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं को निलंबित किया गया था। यह कदम सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजामों के बीच उठाया गया।

हालांकि, इंटरनेट सेवाओं से संबंधित रिपोर्टों में क्षेत्र और अवधि का विवरण अलग-अलग तरीके से सामने आया है। इसलिए इसे पूरे दिल्ली शहर में इंटरनेट बंद होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से केंद्रीय दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास के क्षेत्रों से संबंधित है।

बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया

प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोकने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग बताई गई है। हिंदुस्तान टाइम्स ने लगभग 1,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कही, जबकि इंडियन एक्सप्रेस ने शुरुआती चरण में 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी। बाद की रिपोर्टों में 700 से अधिक लोगों के हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख किया गया।

हिरासत में लिए गए लोगों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों के सदस्यों के साथ कुछ प्रमुख विपक्षी नेता भी शामिल रहे। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, आप नेता सौरभ भारद्वाज और संजय सिंह सहित कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।

SIR को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद

पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में चुनावी मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल और कुछ नागरिक समूह सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम प्रभावित हुए हैं और इससे पात्र मतदाताओं के अधिकार पर असर पड़ सकता है। ये प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोप हैं।

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग ने कहा है कि SIR से संबंधित निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं की सुविधा से जुड़े कई कदमों की भी जानकारी दी है।

इस विवाद से जुड़ा मामला अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कामकाज और SIR से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में आयोग की निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े कदमों को चुनौती दी गई है।

प्रदर्शन का असर राजधानी की यातायात व्यवस्था पर

जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाए जाने का असर सिर्फ प्रदर्शन स्थल तक सीमित नहीं रहा। केंद्रीय दिल्ली की कई प्रमुख सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई और यातायात को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध लगाए गए। मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास बंद होने के कारण यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों और नजदीकी खुले स्टेशनों का सहारा लेना पड़ा।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजधानी में बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और आम नागरिकों की आवाजाही के बीच संतुलन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। प्रशासन के सामने प्रदर्शन स्थल की सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन और सामान्य जनजीवन को प्रभावित होने से बचाने की चुनौती भी रही।

आगे भी जारी रह सकता है आंदोलन

घटनाक्रम के बीच प्रदर्शन से जुड़े संगठनों की ओर से आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए गए हैं। कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके ने घोषणा की है कि यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन किया जाएगा।

ऐसे में आने वाले दिनों में जंतर-मंतर और केंद्रीय दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनी रहेगी। साथ ही SIR, मतदाता सूची और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े विवाद पर राजनीतिक और कानूनी बहस भी आगे बढ़ने की संभावना है। फिलहाल 2 अक्टूबर की घटना ने राजधानी में राजनीतिक प्रदर्शन, सुरक्षा प्रबंध और सार्वजनिक परिवहन को लेकर बड़ा घटनाक्रम दर्ज किया है।

Advertisement