अंतिम संस्कार के बाद घर पहुंचा मृतक, पुलिस की शिनाख्त पर सवाल

इस गलती के कारण दोनों परिवारों के सामने भावनात्मक और धार्मिक रूप से बेहद मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ…

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 4, 2026 11:27 am IST, Published 60 minutes ago

बरेलीः यूपी के बरेली में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने जिस व्यक्ति को अपना परिजन समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया, वह अगले ही दिन जीवित घर लौट आया। घटना के बाद परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, लेकिन पुलिस और शव की शिनाख्त को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, मंशालाल नाम का व्यक्ति किसी वजह से घर से बाहर था। इसी दौरान रेलवे ट्रैक पर एक शव मिला। पुलिस ने शव की पहचान मंशालाल के रूप में कराई। सूचना मिलने पर परिवार को लगा कि मंशालाल की मौत हो चुकी है। परिवार के लोगों ने शव को अपना परिजन मानते हुए अंतिम संस्कार कर दिया।

बताया जा रहा है कि शव की पहचान को लेकर परिवार को पुलिस की ओर से जानकारी दी गई थी। इसी आधार पर उन्होंने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर दी। परिवार अभी इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि अगले दिन मंशालाल अचानक अपने घर पहुंच गया। उसे सामने जिंदा देखकर परिजन हैरान रह गए। कुछ देर तक उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि जिस व्यक्ति को वे मृत समझकर अंतिम विदाई दे चुके हैं, वह उनके सामने खड़ा है।

मंशालाल के घर लौटने के बाद पूरे मामले की तस्वीर बदल गई। जांच में सामने आया कि रेलवे ट्रैक पर मिला शव मंशालाल का नहीं था। उसकी पहचान चंद्रिका यादव के रूप में हुई। यानी जिस शव को मंशालाल समझकर दूसरे परिवार ने अंतिम संस्कार किया, वह वास्तव में चंद्रिका यादव का था।

इस गलती के कारण दोनों परिवारों के सामने भावनात्मक और धार्मिक रूप से बेहद मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है। एक तरफ मंशालाल के परिवार को अपने सदस्य के जीवित होने की खुशी मिली, तो दूसरी तरफ चंद्रिका यादव के परिवार को यह पता चला कि उनके परिजन का अंतिम संस्कार किसी दूसरे परिवार ने कर दिया।

अब मामले में सबसे बड़ा सवाल शव की पहचान की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। आखिर रेलवे ट्रैक से मिले शव की पहचान किस आधार पर मंशालाल के तौर पर की गई और पुलिस ने किन परिस्थितियों में शव दूसरे परिवार को सौंपा? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

वहीं, चंद्रिका यादव के परिवार के लिए यह स्थिति बेहद भावुक करने वाली है। बताया जा रहा है कि अब चंद्रिका यादव का असली बेटा उनकी अस्थियों का विसर्जन करेगा। परिवार अपने परिजन की अंतिम रस्में पूरी करने की तैयारी में है।

इस घटना ने एक बार फिर शव की पहचान की प्रक्रिया में पूरी सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है। पहचान में हुई एक गलती ने जहां एक परिवार को अनजाने में गलत व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने पर मजबूर कर दिया, वहीं दूसरे परिवार को अपने प्रियजन की अंतिम रस्मों के लिए बाद में आगे आना पड़ा। मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शव की गलत शिनाख्त आखिरकैसे हुई।

Advertisement