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गया जेल से प्रयागराज लाया गया अरमान, एससी-एसटी कोर्ट में हुई पेशी

सुनवाई के दौरान अरमान ने अदालत से अपने लिए निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। अदालत ने उसकी मांग को मंजूर करते हुए कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया। किसी आरोपी को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वह अपनी बात अदालत के समक्ष प्रभावी तरीके से रख सके और न्यायिक प्रक्रिया में उसका पक्ष भी सुना जाए।

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  • October 5, 2026 5:33 pm IST, Published 1 hour ago

प्रयागराज:  चर्चित उमेश पाल हत्याकांड के आरोपी अरमान बिहारी को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया। बिहार की गया सेंट्रल जेल में बंद अरमान को ट्रांजिट रिमांड के तहत प्रयागराज लाया गया था। यहां विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी कुमार मयंक की अदालत में उसकी पेशी हुई। अदालत ने अरमान की ओर से की गई निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने की मांग को स्वीकार कर लिया। मामले में अगली सुनवाई के लिए 14 दिन बाद की तारीख तय की गई है।

पुलिस सुरक्षा के बीच अरमान को अदालत परिसर में लाया गया। इस दौरान उसका चेहरा गमछे से ढका हुआ था। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। अदालत में पेशी के बाद न्यायालय के आदेश पर अरमान को वापस गया सेंट्रल जेल भेज दिया गया। पुलिस ने इस पेशी के दौरान उसकी कस्टडी रिमांड की मांग नहीं की।

अरमान बिहारी उमेश पाल हत्याकांड में वांछित आरोपियों में शामिल रहा है। उस पर उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। लंबे समय से फरार चल रहे अरमान तक पुलिस पहुंचने में कामयाब हुई और उसे गया जेल से ट्रांजिट रिमांड पर प्रयागराज लाया गया। इसके बाद अब मामले में न्यायिक प्रक्रिया के तहत उसकी अदालत में पेशी हुई है।

उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की हत्या 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज में हुई थी। वारदात के बाद इस मामले ने प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था को लेकर भी व्यापक चर्चा पैदा की थी। पुलिस ने हत्याकांड की जांच के दौरान कई आरोपियों को चिह्नित किया और अलग-अलग स्थानों से उनकी गिरफ्तारी की। कुछ आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए, जबकि कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

अरमान बिहारी पर भी हत्याकांड में शामिल होने का आरोप है। उसके फरार रहने के कारण पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। गिरफ्तारी के बाद उसे तत्काल प्रयागराज नहीं लाया गया, बल्कि गया जेल से कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ट्रांजिट रिमांड के जरिए यहां लाया गया। अदालत में पेशी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही।

सुनवाई के दौरान अरमान ने अदालत से अपने लिए निशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। अदालत ने उसकी मांग को मंजूर करते हुए कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आदेश दिया। किसी आरोपी को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वह अपनी बात अदालत के समक्ष प्रभावी तरीके से रख सके और न्यायिक प्रक्रिया में उसका पक्ष भी सुना जाए।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 दिन बाद की तारीख तय की है। फिलहाल अरमान को वापस गया सेंट्रल जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने इस चरण पर कस्टडी रिमांड की मांग नहीं की, इसलिए उसकी आगे की हिरासत से जुड़ी स्थिति न्यायालय की अगली कार्यवाही और मामले की जरूरतों के अनुसार तय होगी।

उमेश पाल हत्याकांड की जांच और उससे जुड़े मुकदमों में कई आरोपियों की अदालतों में लगातार पेशी होती रही है। ऐसे में अरमान की प्रयागराज अदालत में हुई पेशी को भी मामले की आगे बढ़ रही कानूनी कार्रवाई के महत्वपूर्ण चरण के तौर पर देखा जा रहा है। अब अगली सुनवाई में उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर कार्यवाही आगे बढ़ने की उम्मीद है।

 

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