लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी के भीतर पिछले कुछ समय से चल रहे पारिवारिक और संगठनात्मक विवाद के बीच सोमवार को बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ ही सप्ताह पहले आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाकर बाहर कर दिया गया था।
आकाश आनंद की वापसी को बसपा के भीतर हालिया घटनाक्रम का अहम मोड़ माना जा रहा है। सितंबर में मायावती ने आकाश को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से अलग कर दिया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी से भी दूरी बना ली थी। इस घटनाक्रम के बीच आकाश ने हाल में मायावती से सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए दोबारा पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने मायावती को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक बताते हुए कहा था कि वह उनके नेतृत्व में ही पार्टी और बहुजन आंदोलन के लिए काम करना चाहते हैं।
आकाश आनंद ने अपने सार्वजनिक संदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि उनके किसी दूसरे राजनीतिक दल में जाने की खबरें सही नहीं हैं। उन्होंने बसपा को केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि अपना परिवार बताया था। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया था कि भविष्य में पार्टी के हितों और नेतृत्व के निर्देशों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाएंगे। उनके इस रुख के बाद बसपा नेतृत्व की ओर से उन्हें दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई थी।
मायावती ने आकाश आनंद को फिर से जिम्मेदारी सौंपने के फैसले के पीछे पार्टी और बहुजन आंदोलन के हित को प्रमुख कारण बताया। उनके मुताबिक आकाश के व्यक्तित्व और कार्यशैली में बदलाव आया है और पार्टी के अधिकांश लोगों ने भी उनकी वापसी का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संगठन में बार-बार बदलाव की स्थिति नहीं बननी चाहिए और आगे की स्थिति काफी हद तक आकाश के आचरण पर निर्भर करेगी।
आकाश की वापसी के घटनाक्रम को पार्टी के भीतर अशोक सिद्धार्थ से जुड़े विवाद के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। मायावती ने पहले आकाश की वापसी को लेकर अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक भविष्य से जुड़ी शर्त रखी थी। उनका कहना था कि पार्टी और बहुजन आंदोलन के हितों को व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर रखना जरूरी है। बाद में अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई भी हुई।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि परमूपज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व उनके परम अनुयायी मान्यवर श्री कांशीराम जी की देश भर में बहुजन-हित हेतु ज़बरदस्त त्याग-तपस्या, आजीवन कड़ा संघर्ष व उनके उच्च आदर्श हमेशा ही प्रेरणा के स्त्रोत रहे हैं, जिस पर चलकर ही बी.एस.पी. ने देश की राजनीति में अभूतपूर्व सफलतायें अर्जित की हैं और अब ख़ासकर आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव को लेकर सर्वसमाज के साथ उत्साहपूर्ण ज़बरदस्त तैयारी भी की जा रही है।
2. यहाँ यह भी कहना हैं कि मेरा निजी नहीं बल्कि पूरा ’बहुजन समाज’ ही मेरा विराट परिवार है और उनका हित व कल्याण मेरे लिये सर्वोपरि है और हमेशा ही रहेगा। इसी को मद्देनज़र रखते हुये व ख़ासकर पार्टी में अनुशासन बनाये रखने के लिये ही मेरे द्वारा पिछले कुछ दिनों में, अनेकों सख़्त फैसले भी लिये गये हैं और इसको लेकर मेरे अपने भाई-बहन व उनके परिवार के लोग कभी भी अपवाद नहीं रहे हैं, जो कि जग-ज़ाहिर है।
3. वैसे तो श्री आकाश आनन्द का व्यक्तित्व पार्टी में काफी हद तक ठीक ही रहा है, लेकिन इनको लेकर पिछले दिनों कुछ ऐसे कारण भी रहें हैं जिसकी वजह से पार्टी संगठन में कई बार कुछ ज़रूरी परिवर्तन भी करने पड़े हैं और फिर अन्ततः श्री आकाश आनन्द के ससुर श्री अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास लेने के लिए मजबूर भी होना पड़ा है।
* जिसके बाद से श्री आकाश आनन्द के व्यक्तित्व व कार्यशैली आदि में काफी कुछ बदलाव भी लोग देख रहे हैं, जिसका ख़ास प्रमाण पार्टी में वापिसी हेतु अभी हाल ही में सोशल मीडिया ’एक्स’ पर किया गया उनका एक पोस्ट भी है, जिसकी काफी चर्चा भी है।
4. इसको लेकर पार्टी के अधिकांशः लोगों का यही कहना है कि श्री आकाश आनन्द के अनुरोध को स्वीकार करते हुये उनकी पूर्व की दी गई ज़िम्मेवारियों के साथ इनको पार्टी में पुनः कार्य करने का मौक़ा दिया जाये, जिसके लिए इनके पिता के साथ-साथ इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द ने भी अपनी सहमति जताई है। वास्तव में श्री ईशान आनन्द ने तो अपनी मिशनरी भावना प्रदर्शित करते हुये यह भी कहा है कि वे बिना किसी पद के ही पार्टी में मा. बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी उनको कार्य सौंपे जायेंगे तो उसे वे अपनी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से ज़रूर निभायेंगे।
5. ऐसे में अब पार्टी काफी सोच-विचार करने के बाद पार्टी व मूवमेन्ट के हित में श्री आकाश आनन्द को पुनः बी.एस.पी. का राष्ट्रीय संयोजक (नेशनल कन्वेनर) बनाकर इनको फिर से पार्टी में कार्य करने का मौक़ा दे रही है। उम्मीद है कि श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति सेे संन्यास लेने के बाद से अब पार्टी में सब कुछ ठीक व सुचारू ढंग से चलेगा और पार्टी संगठन में भी बार-बार परिवर्तन नहीं करना पड़ेगा, हालाँकि यह काफी कुछ श्री आकाश आनन्द के ऊपर भी निर्भर करेगा।
6. इन्ही कुछ ज़रूरी बातों के साथ ही अब मैं पार्टी व मूवमेन्ट के हित में आज लिये गये इस फैसले के साथ ही श्री आकाश आनन्द के राजनैतिक उज्जवल भविष्य की कामना के साथ ही इनको (श्री आकाश आनन्द) व इनके छोटे भाई श्री ईशान आनन्द को तथा इनके पिता श्री आनन्द कुमार को भी अपना बहुत-बहुत प्यार व आशीर्वाद देती हूँ। इतना ही नहीं बल्कि पिछले दिनों हर परिस्थिति में मेरा साथ निभाने के लिए ख़ासकर ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों का व अपने सभी शुभचिन्तकों आदि का भी मैं पूरे तहेदिल से व सम्मान के साथ उनका आभार भी प्रकट करती हूँ।— Mayawati (@Mayawati) October 5, 2026
आकाश को हटाए जाने के बाद बसपा ने उनके छोटे भाई ईशान आनंद को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। सितंबर में ईशान को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने की खबर सामने आई थी। उस समय मायावती ने आकाश और उनकी बहन दीपिका को संगठनात्मक जिम्मेदारियों से दूर रखने की बात कही थी। अब आकाश को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद संगठन में जिम्मेदारियों का नया समीकरण बनना स्वाभाविक माना जा रहा है।
मायावती के इस फैसले के बाद बसपा के भीतर आकाश आनंद की भूमिका को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आकाश को मिली जिम्मेदारी का राजनीतिक महत्व भी देखा जा रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से भविष्य की संगठनात्मक व्यवस्था को लेकर विस्तृत तस्वीर सामने आना अभी बाकी है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बसपा में आकाश आनंद का राजनीतिक सफर एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले जिम्मेदारी से हटाया जाना, फिर पार्टी से बाहर किया जाना, इसके बाद सार्वजनिक माफी और अब राष्ट्रीय संयोजक के पद पर वापसी ने पार्टी की अंदरूनी राजनीति को चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आकाश आनंद नई जिम्मेदारी के साथ किस तरह संगठन में सक्रिय होते हैं और मायावती के भरोसे को अपने काम और आचरण के जरिए किस तरह कायम रखते हैं।