मुरादाबाद में 19 माह में 17 अंतरधार्मिक शादियां, जानिए पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में पिछले 19 महीनों के दौरान 17 अंतरधार्मिक विवाह चर्चा में हैं।

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  • October 6, 2026 10:33 pm IST, Published 1 hour ago

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में पिछले 19 महीनों के दौरान 17 अंतरधार्मिक विवाह चर्चा में हैं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में मुस्लिम युवतियों ने हिंदू युवकों से विवाह किया और विवाह से पहले या उसके दौरान हिंदू धर्म अपनाने की प्रक्रिया पूरी की। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अधिकांश दंपती अब अपने वैवाहिक जीवन में आगे बढ़ रहे हैं और परिवारों की ओर से भी उन्हें स्वीकार किए जाने की बात सामने आई है।

इन मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज है। वायरल पोस्ट में प्रेम, आपसी समझ और विवाह के बाद परिवारों की स्वीकृति को प्रमुखता से बताया गया है। हालांकि, ऐसे संवेदनशील मामलों में यह समझना जरूरी है कि धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक विवाह से जुड़े प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसलिए किसी भी मामले को केवल सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अलग धर्म, लेकिन रिश्ते में बनी रही सहमति

रिपोर्ट के अनुसार, मुरादाबाद में सामने आए इन विवाहों में युवक-युवतियों के बीच पहले परिचय हुआ, बातचीत बढ़ी और बाद में यह संबंध विवाह तक पहुंचा। अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि होने के कारण कुछ परिवारों के सामने शुरुआती स्तर पर सामाजिक और पारिवारिक चुनौतियां भी आईं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ मामलों में युवतियों ने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया अपनाई और इसके बाद हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया। विवाह के बाद संबंधित परिवारों ने भी इन रिश्तों को स्वीकार किया।

यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में विवाह का फैसला वयस्क व्यक्ति की व्यक्तिगत पसंद, सहमति और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। अंतरधार्मिक विवाहों में धर्म परिवर्तन हुआ हो या न हुआ हो, दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति का महत्व सबसे अधिक रहता है।

दो मामलों का भी रिपोर्ट में किया गया उल्लेख

मुरादाबाद की रिपोर्ट में ऐसे दो मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। एक मामले में छजलैट क्षेत्र के गांव की सहरीन खातून अंसारी की मुलाकात अकबरपुर सिहाली निवासी गौरव से हुई। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बीच बातचीत के बाद प्रेम संबंध बना और बाद में दोनों ने मंदिर में विवाह किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बाद दोनों साथ रह रहे हैं।

दूसरे मामले में भोजपुर क्षेत्र के गौरव और ठाकुरद्वारा क्षेत्र की नूर फातिमा का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के बीच परिचय के बाद संबंध विवाह तक पहुंचा और दोनों ने शादी कर ली। रिपोर्ट में दोनों के वैवाहिक जीवन को सामान्य बताया गया है।

इन व्यक्तिगत मामलों को लेकर भी जरूरी है कि संबंधित लोगों की निजी जिंदगी और पहचान का सम्मान किया जाए। विवाह जैसे निजी फैसले को सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करने के बजाय तथ्यात्मक और संतुलित दृष्टिकोण रखना जरूरी है।

कानूनी प्रक्रिया से भी जुड़े रहे कुछ मामले

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ युवतियों को विवाह के शुरुआती दौर में कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। बाद में प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे अपने वैवाहिक जीवन में आगे बढ़ीं। मुरादाबाद के एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मामलों में पुलिस ने अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई की और बालिग युवक-युवतियों ने अदालत के माध्यम से विवाह किया।

यह बयान इस पूरे मामले का महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष सामने रखता है। किसी भी अंतरधार्मिक विवाह में यदि परिवार की ओर से आपत्ति, शिकायत या विवाद सामने आता है तो पुलिस और प्रशासन की भूमिका कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की होती है। वहीं वयस्क युवक-युवती की सहमति और उनके कानूनी अधिकारों को भी ध्यान में रखा जाता है।

परिवार की स्वीकृति ने कम किया सामाजिक तनाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन 17 दंपतियों में विवाह के बाद बड़े विवाद सामने नहीं आए और कई परिवारों ने बहुओं को स्वीकार कर लिया। यदि ऐसा है तो यह पहलू सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में अक्सर परिवार की असहमति सबसे बड़ी चुनौती बनती है।

हालांकि, प्रत्येक विवाह की परिस्थितियां अलग होती हैं। किसी एक या कुछ मामलों के आधार पर पूरे समाज के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। धर्म, परिवार और विवाह जैसे विषय व्यक्तिगत संवेदनाओं से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके बारे में रिपोर्टिंग करते समय संयम और तथ्यपरकता जरूरी है।

सोशल मीडिया पर भी बढ़ी चर्चा

इंस्टाग्राम पर सामने आए पोस्ट के बाद मुरादाबाद के इन मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत पसंद और प्रेम विवाह से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ लोग धर्म परिवर्तन के पहलू पर सवाल उठा रहे हैं।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात यह है कि धर्म परिवर्तन स्वैच्छिक था या नहीं, विवाह दोनों वयस्कों की सहमति से हुआ या नहीं और सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी हुईं या नहीं—इन सवालों को तथ्य और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

अंतरधार्मिक विवाह में सहमति सबसे अहम

कानूनी और सामाजिक दृष्टि से अंतरधार्मिक विवाह का सबसे महत्वपूर्ण आधार दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति है। यदि कोई वयस्क व्यक्ति अपनी इच्छा से विवाह करता है और कानून के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी करता है, तो उसके अधिकारों की रक्षा करना व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

मुरादाबाद के सामने आए इन 17 मामलों ने एक बार फिर अंतरधार्मिक विवाह, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, परिवार की स्वीकृति और धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों को चर्चा में ला दिया है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जिन मामलों में युवक-युवती बालिग थे, वहां कानूनी प्रक्रिया और अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई की गई।

निष्कर्ष: मुरादाबाद में 19 महीनों के दौरान सामने आए 17 अंतरधार्मिक विवाहों की खबर ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर काफी ध्यान खींचा है। रिपोर्ट के मुताबिक कई दंपती अब सामान्य वैवाहिक जीवन जी रहे हैं और परिवारों ने भी उन्हें स्वीकार किया है। हालांकि, धर्म परिवर्तन जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी निष्कर्ष से पहले आधिकारिक दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों की पुष्टि करना जरूरी है।

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