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सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव से कहा, पहले रकम जमा करें फिर सुनवाई

यह विवाद वर्ष 2010 से जुड़ा बताया जाता है। उस समय फिल्म ‘अतापता लापता’ के निर्माण के सिलसिले में मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से वित्तीय लेनदेन हुआ था। आरोप है कि रकम लौटाने के लिए दिए गए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक बैंक से भुगतान के बिना वापस हो गए। इसके बाद चेक बाउंस का कानूनी विवाद...

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  • October 7, 2026 1:02 pm IST, Published 24 minutes ago

नई दिल्ली: में चेक बाउंस से जुड़े पुराने मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अभिनेता राजपाल यादव के मामले में सख्त रुख अपनाया। अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि 13 अक्टूबर तक शिकायतकर्ता को देय रकम में से 2 करोड़ रुपये जमा किए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित रकम जमा किए जाने के बाद ही हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर आगे विचार किया जाएगा। सुनवाई के दौरान राजपाल यादव खुद अदालत में मौजूद रहे।

अदालत में अभिनेता की ओर से 1.15 करोड़ रुपये का डिमांड ड्राफ्ट पेश किया गया। शेष 85 लाख रुपये 13 अक्टूबर तक जमा किए जाने हैं। बताया गया कि यह रकम उस व्यक्ति की ओर से दी जानी है, जिसने राजपाल यादव की संपत्ति खरीदने का सौदा किया है और वह भी सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद था। सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता को उसकी रकम मिलना इस मामले में महत्वपूर्ण है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में लगातार समय दिए जाने को लेकर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि परिस्थितियां ऐसी बनीं तो राजपाल यादव की सजा बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि बार-बार समय देने का उद्देश्य केवल यह है कि शिकायतकर्ता को उसका पैसा वापस मिल सके। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि कानून की प्रक्रिया का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जाना चाहिए कि मामले का समाधान लगातार टलता रहे।

सुनवाई के दौरान राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अतापता लापता’ से हुए कथित वित्तीय नुकसान का उल्लेख किया। अभिनेता ने बताया कि फिल्म के कारण उन्हें करीब 200 से 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और फिल्म के निर्माता भी आर्थिक मुश्किलों में फंस गए थे। इसी संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश ने फिल्म के नाम को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह फिल्म का नाम ‘अतापता लापता’ है, उसी तरह उनका पैसा भी ‘अतापता लापता’ हो गया है। इस पर राजपाल यादव ने हाथ जोड़कर अदालत के प्रति सम्मान जताया।

इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने मजाकिया अंदाज में अभिनेता से कहा कि आगे अच्छी फिल्म बनाकर लोगों का मनोरंजन करें। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में बहस करने वाले वकील भी अच्छे कलाकार हैं और उन्हें फिल्मों में मौका दिया जा सकता है। अदालत की यह बातचीत सुनवाई के दौरान तनावपूर्ण माहौल के बीच कुछ हल्के क्षण लेकर आई। मामले से जुड़े वित्तीय विवाद पर राजपाल यादव ने अदालत परिसर में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि फिल्मों के निर्माण के लिए आमतौर पर बैंक या बाजार से इस तरह का कर्ज नहीं लिया जाता।

उनके मुताबिक घर बनाने या जमीन खरीदने के लिए लोन लिया जा सकता है, जबकि फिल्म निर्माण में पैकेज डील या निवेश जैसी व्यवस्थाएं होती हैं। अभिनेता ने अपने लंबे फिल्मी करियर का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अपने दम पर करीब सौ फिल्मों में काम कर चुके हैं, इसलिए फिल्म बनाने के लिए पारंपरिक तरीके से कर्ज लेने की जरूरत क्यों होगी। अभिनेता ने सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका के प्रति अपना सम्मान भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें देश, संविधान और न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है और अदालत की ओर से जो भी निर्णय दिया जाएगा, वह उसे स्वीकार करेंगे।

यह विवाद वर्ष 2010 से जुड़ा बताया जाता है। उस समय फिल्म ‘अतापता लापता’ के निर्माण के सिलसिले में मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से वित्तीय लेनदेन हुआ था। आरोप है कि रकम लौटाने के लिए दिए गए 1.05 करोड़ रुपये के सात चेक बैंक से भुगतान के बिना वापस हो गए। इसके बाद चेक बाउंस का कानूनी विवाद शुरू हुआ और मामला अदालतों तक पहुंचा।

राजपाल यादव की ओर से मामले में देनदारी को लेकर अलग पक्ष रखा गया है और फिल्म के असफल होने से हुए आर्थिक नुकसान का भी हवाला दिया गया है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार उन्हें 13 अक्टूबर तक 2 करोड़ रुपये जमा करने हैं। इसके बाद ही उनकी याचिका पर आगे की सुनवाई का रास्ता साफ होगा।

 

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