दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और हवा की गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत करने के लिए केंद्र और दिल्ली सरकार ने कई कदमों की शुरुआत की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आनंद विहार में प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान दोनों नेताओं ने शास्त्री पार्क स्थित दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र का भी दौरा किया। कार्यक्रम के दौरान पांच स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही 150 नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई गई और दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए 13 नए केंद्रों की शुरुआत की गई।
आनंद विहार को दिल्ली के प्रमुख प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां वाहनों की अधिक आवाजाही, बस टर्मिनल पर यातायात का दबाव, सड़कों और खुले किनारों से उड़ने वाली धूल, निर्माण कार्य तथा कचरे के अनुचित निपटान जैसी समस्याएं वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हैं। समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के लिए 11 एजेंसियों को अल्पकालिक और दीर्घकालिक उपायों की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सड़क निर्माण, अतिक्रमण हटाना, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय लागू करना और निर्माण एवं विध्वंस से निकले कचरे की अवैध डंपिंग पर कार्रवाई करना शामिल है। क्षेत्र में यातायात की समस्या को कम करने और हरियाली बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी है। उनके अनुसार, आनंद विहार में प्रदूषण के प्रमुख कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। इन उपायों के दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन नियमित निगरानी और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किया जा सकेगा।
कार्यक्रम में सार्वजनिक परिवहन को अधिक स्वच्छ बनाने पर भी जोर दिया गया। स्वामी विवेकानंद अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, आनंद विहार से 150 इलेक्ट्रिक बसों को रवाना किया गया। इसके अतिरिक्त आनंद विहार आईएसबीटी, नंद नगरी डिपो, रोहिणी सेक्टर-37 डिपो, नांगलोई डिपो और केशोपुर डिपो में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशनों का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल बढ़ने से सार्वजनिक परिवहन में पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्रदूषण में वास्तविक कमी का आकलन वाहनों के संचालन, ऊर्जा स्रोतों और अन्य उत्सर्जन कारकों को ध्यान में रखकर करना होगा।
वायु गुणवत्ता की निगरानी को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली में 13 नए सतत परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र भी शुरू किए गए। ये केंद्र घुम्मनहेड़ा, छावला, कराला, हस्तसाल, झरोदा कलां, घोगा, बुराड़ी, टिकरी कलां, नरेला, मैदान गढ़ी, नांगलोई, वसुंधरा एन्क्लेव और बदरपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं। इनसे हवा में प्रदूषकों और मौसम संबंधी स्थितियों के आंकड़े नियमित रूप से उपलब्ध होंगे। इससे प्रदूषण के स्तर का वैज्ञानिक आकलन करने, प्रभावित क्षेत्रों की पहचान करने और संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए जानकारी देने में सहायता मिलेगी।

शास्त्री पार्क स्थित डीपीसीसी का एआई-सक्षम एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्लेटफॉर्म वायु गुणवत्ता, धूल नियंत्रण, औद्योगिक उत्सर्जन, ध्वनि स्तर, पराली जलाने की घटनाओं, नागरिक शिकायतों और प्रवर्तन वाहनों से संबंधित सूचनाओं को एक जगह एकत्र करने के लिए तैयार किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसमें 15 बाहरी डेटा प्रणालियों को जोड़ने की योजना है, जिनमें से नौ को एकीकृत किया जा चुका है। इससे अधिकारियों को विभिन्न स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर निगरानी और कार्रवाई में समन्वय बनाने में मदद मिल सकती है।
नए 13 निगरानी केंद्र जुड़ने के बाद दिल्ली में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की कुल संख्या 60 होने की जानकारी दी गई। इन केंद्रों के आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वर और समीर मोबाइल ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री ने ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने, प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में सुधार और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के लिए दिल्ली सरकार के प्रयासों की सराहना की। इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदूषण नियंत्रण के उपाय कितनी नियमितता से लागू होते हैं और निगरानी में सामने आने वाली समस्याओं पर कितनी तेजी से कार्रवाई की जाती है।