लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों को लेकर चर्चाएं तेज होने लगी हैं। इस बार चुनाव फरवरी में होंगे या मार्च तक आगे बढ़ सकते हैं, इसे लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। इन चर्चाओं की प्रमुख वजह उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं का घोषित कार्यक्रम है। बोर्ड की परीक्षाएं 5 फरवरी से शुरू होकर 24 फरवरी 2027 तक चलेंगी। ऐसे में चुनावी तैयारियों और परीक्षा व्यवस्था के बीच तालमेल बैठाना प्रशासन के लिए अहम होगा।
यूपी बोर्ड ने वर्ष 2027 की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। निर्धारित समय के मुताबिक परीक्षाएं लगभग 20 दिनों में पूरी होंगी। पहली पाली सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएगी। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं 5 फरवरी को हिंदी विषय के पेपर से शुरू होंगी। अंतिम परीक्षाएं 24 फरवरी को निर्धारित हैं।
इंटरमीडिएट की परीक्षा में 8 फरवरी को अंग्रेजी, 9 फरवरी को नागरिक शास्त्र और 11 फरवरी को इतिहास का पेपर होगा। 12 फरवरी को जीव विज्ञान और गणित की परीक्षा निर्धारित की गई है। इसके बाद 13 फरवरी को अर्थशास्त्र तथा 15 फरवरी को रसायन विज्ञान और समाजशास्त्र की परीक्षा होगी। 16 फरवरी को भूगोल, 17 फरवरी को भौतिक विज्ञान और सैन्य विज्ञान, जबकि 19 फरवरी को मानव विज्ञान का पेपर आयोजित किया जाएगा। 20 फरवरी को मनोविज्ञान, शिक्षाशास्त्र और तर्कशास्त्र की परीक्षा होगी। इसके अलावा 22 फरवरी को व्यवसाय अध्ययन और गृह विज्ञान, 23 फरवरी को लेखाशास्त्र तथा 24 फरवरी को संस्कृत की परीक्षा तय की गई है। हाईस्कूल की परीक्षाओं में 22 फरवरी को चित्रकला और रंजनकला तथा 24 फरवरी को कृषि विषय का पेपर होगा।
परीक्षा कार्यक्रम सामने आने के बाद चुनाव की संभावित समयसीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। इसके साथ ही स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों का इस्तेमाल मतदान केंद्रों के रूप में भी किया जाता है। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं के दौरान चुनाव कराने से संसाधनों और कर्मचारियों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से यह संभावना जताई जा रही है कि चुनाव कार्यक्रम तय करते समय आयोग परीक्षा की तारीखों को ध्यान में रख सकता है।
पिछले विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम भी इस चर्चा में उदाहरण के तौर पर सामने आ रहा है। वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश में सात चरणों में 10 फरवरी से 7 मार्च तक मतदान हुआ था। मतगणना 10 मार्च को कराई गई थी। उस चुनाव की तारीखों की घोषणा 8 जनवरी को हुई थी। हालांकि पिछले चुनाव के कार्यक्रम को आगामी चुनाव के लिए निश्चित आधार नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रत्येक चुनाव में परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार फैसला लिया जाता है।
चुनावी तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयोग की आगामी गतिविधियों पर भी नजर रहेगी। चर्चाओं के मुताबिक, नवंबर में चुनाव संबंधी तैयारियों की समीक्षा और दिसंबर में विस्तृत बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन संभावित बैठकों या चुनाव की तारीखों को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। चुनाव कार्यक्रम तय करने का अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है और फिलहाल फरवरी या मार्च में मतदान होने की पुष्टि नहीं हुई है।
फरवरी के अंतिम सप्ताह में बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद चुनावी गतिविधियों के लिए समय उपलब्ध हो सकता है। इस आधार पर मार्च में मतदान की संभावना को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। दूसरी ओर, अप्रैल और मई में बढ़ने वाली गर्मी भी चुनाव कार्यक्रम बनाते समय एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकती है। आयोग को मतदान चरणों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों की उपलब्धता और प्रशासनिक तैयारियों जैसे कई बिंदुओं पर विचार करना होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी 2027 में आयोजित होंगी, जबकि विधानसभा चुनाव की तारीखों पर कोई अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं हुआ है। इसलिए फरवरी या मार्च में चुनाव होने की चर्चाओं को अभी संभावनाओं और अनुमानों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। वास्तविक तस्वीर निर्वाचन आयोग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।