लखनऊ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए युवाओं और छात्रों की ऊर्जा का इस्तेमाल देश में अराजकता फैलाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और असहमति जताना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती।
लखनऊ में अपने संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का उल्लेख करते हुए पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल, 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुई हिंसा और 1990 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवकों पर हुई गोलीबारी के संदर्भ में कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने इन घटनाओं को कांग्रेस के शासनकाल की गंभीर गलतियां बताते हुए कहा कि मौजूदा समय में भी संवैधानिक मूल्यों और संस्थाओं पर चोट पहुंचाने की कोशिशें हो रही हैं।
रक्षा मंत्री ने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करने का दावा करने वालों को यह समझना चाहिए कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अराजकता फैलाने या संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने की अनुमति नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कानून का सम्मान करना और जनमत के फैसले को स्वीकार करना भी उतना ही जरूरी है। राजनाथ सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की टिप्पणियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के सम्मान के संदर्भ में समझने की जरूरत है। उन्होंने राहुल गांधी को सलाह दी कि वे लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर व्यवधान पैदा करने की राजनीति करने के बजाय जनादेश का सम्मान करें और अपनी राजनीतिक भूमिका पर आत्ममंथन करें।
दिल्ली में हाल के घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके राजनीतिक सहयोगी युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों तथा राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के बजाय उन्हें राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, छात्रों और नौजवानों की ऊर्जा का उपयोग शिक्षा, रोजगार, नवाचार और देश के विकास में होना चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियों में जो सामाजिक तनाव को बढ़ावा दें। उन्होंने विपक्ष के कुछ नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि देश में सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश के घटनाक्रम से प्रेरणा लेने और सरकार गिराने जैसी बातें कही जा रही हैं। राजनाथ सिंह ने इन बयानों को गंभीर बताते हुए कहा कि विपक्ष का विरोध केवल चुनाव सुधार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) या मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं दिखाई देता, बल्कि इसके पीछे सत्ता हासिल करने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा भी नजर आती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सरकार बदलने का सबसे उचित और वैध माध्यम चुनाव होता है। जनता अपने मताधिकार के जरिए सरकार के पक्ष या विपक्ष में फैसला करती है। ऐसे में राजनीतिक दलों को संवैधानिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर रहकर अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि राजनीतिक असहमति को टकराव में बदलने से देश की विकास यात्रा प्रभावित हो सकती है। साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी राजनीतिक दल के हितों के लिए इस्तेमाल करने के बजाय उन्हें राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाना चाहिए।
राजनाथ सिंह के बयान से स्पष्ट है कि मौजूदा राजनीतिक माहौल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज बना हुआ है। जहां रक्षा मंत्री ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए, वहीं उनके बयान ने लोकतांत्रिक विरोध, संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस को फिर केंद्र में ला दिया है।