IIT का सपना टूटा, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला नहीं

प्रतापगढ़ के उत्तम कुमार तिवारी की संघर्षगाथा: IIT में दाखिले का सपना अधूरा रहा, बीटेक के बाद 10 हजार रुपये की नौकरी की और कई प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलताओं का सामना किया। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी और UPPCS 2021 में 24वीं रैंक हासिल कर एसडीएम बनने का लक्ष्य पूरा किया।

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  • October 21, 2026 11:59 pm IST, Published 15 minutes ago

उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से ताल्लुक रखने वाले उत्तम कुमार तिवारी की सफलता की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार असफल होने के बाद अपने लक्ष्य को लेकर निराश हो जाते हैं। उत्तम की यात्रा बताती है कि करियर में शुरुआती असफलताएं किसी व्यक्ति की अंतिम मंजिल तय नहीं करतीं। सही दिशा, लगातार प्रयास और अपनी कमजोरियों को पहचानकर उनमें सुधार करना सफलता की राह बना सकता है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तम का परिवार सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच जीवन व्यतीत करता था। उनके पिता सिविल कोर्ट में क्लर्क थे। परिवार की उम्मीद थी कि उत्तम अच्छी शिक्षा हासिल करके बेहतर करियर बनाएंगे। उनके पिता चाहते थे कि बेटा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT में पढ़ाई करे। हालांकि, प्रवेश परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका।

इस असफलता के बाद भी उत्तम ने पढ़ाई से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एक निजी संस्थान से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान अंग्रेजी भाषा को लेकर आने वाली कठिनाइयां भी उनके लिए चुनौती बनी रहीं। भाषा संबंधी परेशानी के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा।

बीटेक के बाद 10 हजार रुपये की नौकरी

इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद उत्तम ने नौकरी शुरू की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें करीब 10 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन वाली नौकरी मिली। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पर खर्च और उसके बाद मिलने वाले वेतन के बीच अंतर को लेकर उन्हें सामाजिक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।

हालांकि, किसी भी करियर की शुरुआत हमेशा बड़ी तनख्वाह से नहीं होती। कई बार शुरुआती नौकरी व्यक्ति को आर्थिक सहारा देने के साथ-साथ अनुभव और आगे की तैयारी के लिए अवसर भी देती है। उत्तम ने नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। यह उनके सफर का ऐसा दौर था, जिसमें उन्हें रोजगार और अपने बड़े लक्ष्य के बीच संतुलन बनाना पड़ा।

उनकी कहानी का महत्वपूर्ण पक्ष यही है कि उन्होंने अपनी वर्तमान परिस्थिति को अंतिम मंजिल नहीं माना। सीमित वेतन वाली नौकरी करते हुए भी उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य बनाए रखा।

UPSC, PCS और SSB में कई बार मिली असफलता

उत्तम कुमार तिवारी ने सरकारी सेवा में पहुंचने के लिए अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयास किया। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने सेना में अधिकारी बनने के उद्देश्य से सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड यानी SSB की परीक्षा भी दी। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की परीक्षाओं की तैयारी की।

इन प्रयासों में उन्हें कई बार असफलता का सामना करना पड़ा। प्रकाशित रिपोर्टों में उनकी कुल 13 असफलताओं का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि SSB में पांच प्रयासों के दौरान उन्हें सफलता नहीं मिली। UPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी उनके प्रयास सफल नहीं हो सके। वहीं, UPPCS की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार तक पहुंचने के बाद भी उन्हें कई बार निराशा हाथ लगी।

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी जानते हैं कि प्रारंभिक परीक्षा पास करना, मुख्य परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना और साक्षात्कार में चयनित होना अलग-अलग चुनौतियां हैं। एक चरण में सफलता मिलने के बाद भी अंतिम चयन सुनिश्चित नहीं होता।

ऐसी परिस्थितियों में असफलता के कारणों का विश्लेषण करना जरूरी होता है। पढ़ाई की रणनीति, उत्तर लिखने का अभ्यास, समय प्रबंधन, समसामयिक घटनाओं की समझ और साक्षात्कार की तैयारी में सुधार करके आगे के प्रयासों को बेहतर बनाया जा सकता है। उत्तम के सफर को भी इसी दृष्टि से देखा जा सकता है।

नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच तैयारी

उत्तम की कहानी को चर्चा में लाने वाला एक महत्वपूर्ण पहलू उनकी पारिवारिक जिम्मेदारियां भी हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने नौकरी करते हुए और शादी के बाद पारिवारिक दायित्व निभाते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। ऐसे समय में पढ़ाई के लिए नियमित समय निकालना आसान नहीं होता।

नौकरी करने वाले अभ्यर्थियों के सामने अक्सर समय की कमी, थकान और आर्थिक जिम्मेदारियों जैसी चुनौतियां रहती हैं। उन्हें कार्यालय के काम के साथ पढ़ाई, परिवार और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। ऐसे में एक व्यावहारिक अध्ययन योजना काफी मददगार हो सकती है।

उत्तम के संघर्ष से यह सीख मिलती है कि तैयारी के दौरान केवल लंबे समय तक पढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं, बल्कि नियमितता और पढ़ाई की गुणवत्ता भी मायने रखती है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास, विषयों का बार-बार दोहराव और कमजोर क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना तैयारी को अधिक प्रभावी बना सकता है।

UPPCS 2021 में 24वीं रैंक ने बदली तस्वीर

लगातार प्रयासों के बाद उत्तम कुमार तिवारी को वह सफलता मिली, जिसके लिए वह लंबे समय से मेहनत कर रहे थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने UPPCS 2021 में 24वीं रैंक हासिल की और उपजिलाधिकारी यानी SDM पद तक पहुंचे। उनकी सफलता इस बात का उदाहरण है कि कई बार मंजिल तक पहुंचने में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है।

इस उपलब्धि को केवल एक परीक्षा में मिली रैंक के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके पीछे शिक्षा से जुड़ी चुनौतियां, नौकरी के दौरान तैयारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलताएं और लगातार लक्ष्य की ओर बढ़ने का प्रयास शामिल रहा।

प्रशासनिक सेवा में चयन के साथ किसी अभ्यर्थी के सामने नई जिम्मेदारियां भी आती हैं। उपजिलाधिकारी के रूप में कानून-व्यवस्था, राजस्व प्रशासन, जनसमस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े दायित्व महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए इस पद पर पहुंचना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने का अवसर भी है।

युवाओं के लिए क्या है इस सफलता का संदेश?

उत्तम कुमार तिवारी की यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को कई महत्वपूर्ण संदेश देती है। पहला, असफलता मिलने पर अपनी क्षमता पर संदेह करने के बजाय यह समझना चाहिए कि कमी कहां रह गई। दूसरा, आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच भी व्यावहारिक लक्ष्य और नियमित दिनचर्या बनाई जा सकती है। तीसरा, किसी दूसरे व्यक्ति की टिप्पणी के आधार पर अपने करियर का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए।

हालांकि, हर अभ्यर्थी की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए किसी एक सफलता की कहानी को सभी के लिए निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं मानना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन मेहनत के साथ-साथ उपलब्ध पदों, परीक्षा के स्तर, तैयारी की गुणवत्ता और कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है।

फिर भी उत्तम का सफर एक सकारात्मक संदेश देता है—असफलता आने पर रणनीति बदलना, अपनी कमजोरियों पर काम करना और लक्ष्य के प्रति अनुशासन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। बीटेक के बाद सीमित वेतन वाली नौकरी से लेकर प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने की उनकी यात्रा उन युवाओं को प्रेरित कर सकती है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद आगे बढ़ने का सपना देखते हैं।

निष्कर्ष: उत्तम कुमार तिवारी की कहानी बताती है कि करियर की शुरुआत और अंतिम उपलब्धि के बीच लंबा अंतर हो सकता है। IIT में प्रवेश नहीं मिला, नौकरी में उम्मीद के अनुरूप वेतन नहीं था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कई प्रयास असफल रहे, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। UPPCS 2021 में 24वीं रैंक हासिल करने की उपलब्धि उनके निरंतर प्रयासों की याद दिलाती है। युवाओं के लिए सबसे बड़ी सीख यही है कि असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ना ही सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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