• होम
  • व्यापार
  • मिडिल ईस्ट से तेल खरीद में कटौती की तैयारी, दूसरे विकल्प तलाश रही IOC

मिडिल ईस्ट से तेल खरीद में कटौती की तैयारी, दूसरे विकल्प तलाश रही IOC

भारत के लिए तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा होता है। मध्य पूर्व पारंपरिक रूप से भारतीय रिफाइनरियों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है, खासकर भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल के मामले में। क्षेत्र की भौगोलिक निकटता भी इसे भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में खरीद रणनीति में बदलाव का उद्देश्य केवल...

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 21, 2026 9:35 pm IST, Published 1 hour ago

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच भारत की तेल खरीद रणनीति में बदलाव की चर्चा है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) कथित तौर पर भविष्य में खाड़ी देशों से होने वाली सालाना कच्चे तेल की खरीद में कुछ कटौती करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना और किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम को कम करना बताया जा रहा है।

हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि इंडियन ऑयल के पेट्रोल पंपों पर खाड़ी देशों का तेल मिलना पूरी तरह बंद हो जाएगा। कच्चे तेल की खरीद, रिफाइनरी में उसका प्रसंस्करण और पेट्रोल पंपों पर बिकने वाले ईंधन की आपूर्ति अलग-अलग चरण हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, IOC वित्त वर्ष 2027-28 में खाड़ी देशों के उत्पादकों के साथ होने वाले सालाना समझौतों के तहत कच्चे तेल की खरीद में मामूली कटौती कर सकती है। रॉयटर्स की 21 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में कंपनी से जुड़े एक सूत्र के हवाले से यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए सालाना समझौतों के तहत अपने कच्चे तेल के आयात का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व के उत्पादकों से फ्री-ऑन-बोर्ड (FOB) आधार पर खरीदने की योजना बनाई थी।

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह तेल की आपूर्ति में आ रही बाधाएं और परिवहन लागत में बढ़ोतरी बताई जा रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर तेल की डिलीवरी में देरी हो सकती है और माल ढुलाई तथा बीमा का खर्च बढ़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में तेल कंपनियों के लिए समय पर कच्चा तेल हासिल करना और उसकी लागत नियंत्रित रखना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

तेल की जरूरत पूरी करने के लिए भारतीय रिफाइनरियां दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कंपनियों ने स्पॉट मार्केट से तेल खरीदने का सहारा लिया है। स्पॉट खरीद का मतलब है कि तेल की खरीद तत्काल उपलब्ध खेपों के आधार पर की जाती है, जबकि सालाना समझौतों में पहले से निर्धारित शर्तों के तहत आपूर्ति होती है। कुछ उत्पादक बढ़ी हुई परिवहन लागत का हिस्सा स्वयं वहन करने की पेशकश भी कर रहे हैं, ताकि खरीदारों को आकर्षित किया जा सके।

रूस से आने वाला कच्चा तेल भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए एक विकल्प रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य पूर्व से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी। हालांकि, भविष्य में इसकी मात्रा बाजार की स्थिति, उपलब्धता और कीमतों पर निर्भर कर सकती है। यदि खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति सामान्य होती है और उत्पादक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर तेल उपलब्ध कराते हैं, तो खरीद के अनुपात में फिर बदलाव संभव है।

भारत के लिए तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा होता है। मध्य पूर्व पारंपरिक रूप से भारतीय रिफाइनरियों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है, खासकर भारी और अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल के मामले में। क्षेत्र की भौगोलिक निकटता भी इसे भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में खरीद रणनीति में बदलाव का उद्देश्य केवल किसी एक क्षेत्र से दूरी बनाना नहीं, बल्कि आपूर्ति में रुकावट आने पर दूसरे स्रोतों से जरूरत पूरी करने की क्षमता बढ़ाना भी है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में IOC की ओर से खाड़ी देशों से तेल खरीद पूरी तरह बंद करने की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कंपनी के पेट्रोल पंपों पर अब मध्य पूर्व का तेल या उससे बने ईंधन नहीं मिलेंगे। कंपनी की योजना सालाना आयात समझौतों के तहत खरीद में सीमित कटौती करने की है। आगे की रणनीति अंतरराष्ट्रीय बाजार, समुद्री मार्गों की स्थिति, परिवहन लागत और तेल उत्पादकों की पेशकश पर निर्भर करेगी।

 

Advertisement