• होम
  • देश
  • भारत-चीन सीमा पर शांति जरूरी, गश्त व्यवस्था पर जोर

भारत-चीन सीमा पर शांति जरूरी, गश्त व्यवस्था पर जोर

मंत्रालय के अनुसार, जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति में बाधा कम करना प्राथमिकता है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक आवश्यक चिकित्सा सामग्री पहुंचाई जा सके। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण परिवहन और हवाई मार्गों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच समन्वय जरूरी है।

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • October 23, 2026 7:45 pm IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्लीः  भारत-चीन सीमा पर टकराव की स्थिति को लेकर विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव की स्थिति तब पैदा होती है, जब चीनी सैनिक निर्धारित गश्त व्यवस्था से अलग हटकर गतिविधियां करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने और किसी भी तरह की गलतफहमी से बचने के लिए राजनयिक तथा सैन्य स्तर पर बातचीत जारी रखे हुए हैं।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और चीन सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं। दोनों पक्ष कुछ विशेष क्षेत्रों में एलएसी को लेकर अपनी आपसी समझ को और स्पष्ट करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए सहमत हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के लिए सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

यह प्रतिक्रिया भारत-चीन सीमा पर सैनिकों के बीच आमने-सामने आने और टकराव की स्थिति बनने को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद आई है। आईटीबीपी प्रमुख ने कहा था कि पिछले कुछ समय के दौरान वास्तविक नियंत्रण रेखा पर कई बार भारतीय सैनिकों और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों का आमना-सामना हुआ। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियों में आईटीबीपी के जवानों ने मजबूती से स्थिति का सामना किया। उन्होंने बल के कमांडो के साहस और कार्यक्षमता की भी सराहना की थी।

आईटीबीपी महानिदेशक के इस बयान के बाद भारत-चीन संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। विपक्षी दलों ने भी सीमा की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। इसी बीच विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के व्यापक संबंधों के लिए आवश्यक है और विवादों का समाधान मौजूदा संवाद व्यवस्थाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए।

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर लंबे समय से कई मुद्दे लंबित हैं। ऐसे में दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक संवाद को महत्वपूर्ण माना जाता है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि दोनों पक्ष गलत आकलन और अनावश्यक तनाव से बचने के लिए स्थापित तंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं। सीमा क्षेत्रों में आपसी समझ को बेहतर बनाने के प्रयासों का उद्देश्य भी विवादों को नियंत्रित करना और स्थिरता बनाए रखना है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ईरान को जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति से संबंधित स्थिति पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में लगातार सहयोग कर रहा है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण भारत और ईरान के बीच हवाई संपर्क तथा उड़ानों के संचालन में कई चुनौतियां सामने आई हैं। इसके बावजूद भारत मानवीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दवाओं की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए ईरान के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। मंत्रालय के अनुसार, जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति में बाधा कम करना प्राथमिकता है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक आवश्यक चिकित्सा सामग्री पहुंचाई जा सके। क्षेत्रीय संघर्ष के कारण परिवहन और हवाई मार्गों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच समन्वय जरूरी है।

भारत की ओर से दिए गए इन बयानों में सीमा सुरक्षा, चीन के साथ संवाद और ईरान को मानवीय सहायता जैसे अलग-अलग मुद्दों पर सरकार का रुख सामने आया है। एक ओर भारत एलएसी पर स्थिरता बनाए रखने और लंबित विवादों के समाधान के लिए बातचीत पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय संघर्ष के बीच जीवनरक्षक दवाओं की आपूर्ति जारी रखने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

 

Advertisement