नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में मिठाइयों, पकवानों और घी की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। बाजार में असली घी के नाम पर मिलावटी उत्पाद बेचे जाने का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में गुजरात के सूरत में 900 किलोग्राम कथित नकली घी पकड़े जाने की खबर ने खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
ऐसे में त्योहारों के दौरान घी खरीदते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। मिलावटी घी न केवल खाने का स्वाद और गुणवत्ता प्रभावित कर सकता है, बल्कि उसमें इस्तेमाल किए गए पदार्थों के आधार पर स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को घी खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और विश्वसनीयता पर ध्यान देना चाहिए।
त्योहारों के दौरान घी की मांग बढ़ने पर कुछ मुनाफाखोर अधिक कमाई के लिए उसमें सस्ते तेल और अन्य पदार्थ मिलाकर बेच सकते हैं। मिलावट के लिए वनस्पति तेल, स्टार्च, उबले हुए आलू, शकरकंद और कुछ मामलों में खराब गुणवत्ता वाली पशु वसा जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका रहती है।
ऐसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी मात्रा के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम पैदा हो सकते हैं। दूषित या घटिया सामग्री से बने खाद्य पदार्थ पाचन संबंधी परेशानी पैदा कर सकते हैं। वहीं, कुछ प्रकार की वसा का अधिक सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
इसलिए केवल कम कीमत देखकर घी खरीदना समझदारी नहीं है। बहुत सस्ता घी मिलने पर उसकी गुणवत्ता और स्रोत की जांच करना जरूरी है।
1. पैकेट और लेबल की जांच करें: पैक बंद घी खरीदते समय उत्पाद का नाम, सामग्री, निर्माण और समाप्ति तिथि तथा खाद्य सुरक्षा से संबंधित जानकारी जरूर देखें।
2. विश्वसनीय दुकानदार से खरीदारी करें: घी हमेशा भरोसेमंद दुकान या अधिकृत विक्रेता से खरीदें। खुले में बिकने वाले ऐसे घी से बचें, जिसकी गुणवत्ता और स्रोत की जानकारी उपलब्ध न हो।
3. असामान्य कीमत से सावधान रहें: यदि किसी ब्रांड का घी सामान्य बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर बेचा जा रहा है, तो खरीदने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करें।
4. रंग और गंध पर ध्यान दें: घी के रंग या गंध में असामान्य बदलाव संदेह पैदा कर सकता है। हालांकि, केवल रंग, खुशबू या बनावट देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि घी असली है या नकली।
5. संदेह होने पर जांच कराएं: यदि घी की गुणवत्ता पर संदेह है, तो केवल घरेलू प्रयोगों पर भरोसा करने के बजाय खाद्य सुरक्षा विभाग या मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच कराने का विकल्प चुनें।
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर नकली घी की पहचान के कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं। इनमें घी को गर्म करना, ठंडा करना या उसमें अलग-अलग पदार्थ मिलाकर देखना शामिल है। हालांकि, ऐसे प्रयोग सभी प्रकार की मिलावट का पता नहीं लगा सकते।
घी की शुद्धता की पुष्टि के लिए वैज्ञानिक परीक्षण अधिक विश्वसनीय होते हैं। इसलिए किसी घरेलू तरीके से सामान्य परिणाम मिलने का अर्थ यह नहीं है कि घी पूरी तरह शुद्ध है।
त्योहारों पर मिठाइयां और पारंपरिक पकवान परिवार की खुशियों का हिस्सा होते हैं। लेकिन खाद्य पदार्थों में मिलावट इन खुशियों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी में बदल सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को जागरूक रहना चाहिए और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करने वाले विश्वसनीय विक्रेताओं से ही खरीदारी करनी चाहिए।
यदि किसी दुकान पर मिलावटी घी बेचे जाने का संदेह हो, तो संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है। जागरूकता और सावधानी से ही मिलावटखोरी पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।