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हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी पीजी सीटें,केंद्र सरकार ने दी मंजूरी

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष उठाए जाने के बाद मिली मंजूरी को हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। इससे राज्य के मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक क्षमता बढ़ाने…

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  • October 24, 2026 12:00 pm IST, Published 57 minutes ago

हिमाचल प्रदेश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवंपरिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने जानकारी दी कि राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएट (पीजी) मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाकर320 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से लगभग 415 करोड़ रुपये का अनुदान दियाजाएगा। इस फैसले से राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने और मेडिकल शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने में मदद मिलने कीउम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव 23 जून को केंद्र को प्राप्त हुआ था। इसकेबाद इस प्रस्ताव पर विचार किया गया। छह अक्टूबर को बिलासपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आयोजित दीक्षांतसमारोह के दौरान हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी इस विषय पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा की थी। अब केंद्र सरकारने प्रस्तावित सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी है।

इस निर्णय के तहत राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग संख्या में पीजी सीटें स्वीकृत की गई हैं। इनमें हमीरपुर मेडिकलकॉलेज को 57 सीटें, चंबा को 28 सीटें, मंडी को 55 सीटें, नाहन को 32 सीटें, शिमला को 91 सीटें और टांडा मेडिकल कॉलेज को 57 सीटें मिलीहैं। इन सभी संस्थानों में स्वीकृत सीटों को मिलाकर कुल संख्या 320 होती है। शिमला को सबसे अधिक 91 सीटें मिली हैं, जबकि चंबा में 28सीटें स्वीकृत की गई हैं।

पीजी मेडिकल सीटों में बढ़ोतरी का सीधा संबंध चिकित्सा क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसरों से है। मेडिकल की स्नातक डिग्री पूरी करनेके बाद डॉक्टर पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रमों के माध्यम से किसी विशेष चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करते हैं। ऐसे में सीटों की संख्या बढ़ने सेअधिक डॉक्टरों को विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, इन सीटों का वास्तविक लाभ संबंधित कॉलेजों मेंउपलब्ध विभागों, शिक्षकों, प्रशिक्षण सुविधाओं और प्रवेश प्रक्रिया पर भी निर्भर करेगा।

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण विषय है। राज्य के कई क्षेत्रों में भौगोलिकपरिस्थितियों और दूरस्थ आबादी के कारण बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण रहता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने सेभविष्य में सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेजों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण औरचिकित्सा सेवाओं को विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

केंद्र सरकार की ओर से लगभग 415 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा इस विस्तार योजना के वित्तीय पक्ष को भी महत्वपूर्ण बनाती है। इसराशि से संबंधित परियोजना के तहत आवश्यक सुविधाओं और संसाधनों के विकास में सहायता मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना केक्रियान्वयन, धनराशि के इस्तेमाल और सीटों पर प्रवेश शुरू होने की समयसीमा से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग से सामने आना महत्वपूर्णहोगा।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से इस मुद्दे को केंद्र के समक्ष उठाए जाने के बाद मिली मंजूरी को हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है। इससे राज्य के मेडिकल कॉलेजों की शैक्षणिक क्षमता बढ़ाने और विशेषज्ञ चिकित्सा प्रशिक्षण कादायरा विस्तृत करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

कुल मिलाकर, छह मेडिकल कॉलेजों में 320 पीजी मेडिकल सीटों की मंजूरी और करीब 415 करोड़ रुपये के प्रस्तावित केंद्रीय अनुदान सेहिमाचल प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को नई मजबूती मिलने की संभावना है। आने वाले समय में इस योजना का प्रभाव सीटों के संचालन, विशेषज्ञडॉक्टरों के प्रशिक्षण और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में होने वाले सुधारों के आधार पर देखा जाएगा।

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