समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, वायुसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैन्य कार्रवाई का दायरा काफी व्यापक था। अभियान लगभग 1,200 किलोमीटर की चौड़ाई और 200 किलोमीटर की गहराई तक फैला हुआ था। इस दौरान निर्धारित लक्ष्यों पर सटीक हमले किए गए। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने राष्ट्रीय सुरक्षा में वायु शक्ति की अहमियत को रेखांकित किया और भारत की जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को सामने रखा।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस सफलता के साथ भविष्य की चुनौतियों को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि किसी एक अभियान की उपलब्धि के आधार पर संतुष्ट होकर नहीं बैठना चाहिए, बल्कि सैन्य क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाना आवश्यक है। उनके अनुसार, बदलते सुरक्षा हालात में सेना के पास कार्रवाई के कई विकल्प होने चाहिए, ताकि विरोधी की रणनीति में बदलाव होने पर तुरंत प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
उन्होंने क्षमता आधारित सैन्य व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा कि किसी एक हथियार या तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। अलग-अलग परिस्थितियों के अनुरूप रणनीति बदलने की क्षमता सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों से यह भी सामने आया कि खुफिया सूचनाओं, नेटवर्क आधारित संचालन और हथियार प्रणालियों के समन्वय से अभियान की प्रभावशीलता बढ़ाई जा सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में की गई थी। इस अभियान के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, शुरुआती कार्रवाई में नौ आतंकी ठिकानों को लक्ष्य बनाया गया। इसके बाद बढ़े सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर भी भारतीय कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी।
वायुसेना प्रमुख ने स्वदेशी हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, भारत में विकसित तकनीकों ने अभियान के दौरान अपनी उपयोगिता दिखाई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य अभियान की सफलता को किसी एक लड़ाकू विमान या हथियार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें सटीक खुफिया जानकारी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, नेटवर्क आधारित संचालन, मारक हथियारों और हवाई सुरक्षा प्रणालियों का संयुक्त योगदान अहम होता है।
उन्होंने हवाई सुरक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी नेटवर्क आधारित प्रणालियों की भूमिका का भी उल्लेख किया। ऐसी व्यवस्थाओं का उद्देश्य दुश्मन की ओर से आने वाले ड्रोन और अन्य हवाई खतरों की पहचान करना तथा उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को मजबूत बनाना है। आधुनिक युद्ध में निगरानी और समय पर सूचना मिलने की अहमियत लगातार बढ़ रही है, इसलिए भारतीय वायुसेना इन क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को विकसित करने पर ध्यान दे रही है।
भविष्य की तैयारियों के तहत भारतीय वायुसेना निगरानी एवं खुफिया जानकारी जुटाने वाली प्रणालियों, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन रोधी तकनीक, सुरक्षित संचार नेटवर्क और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधानों पर जोर दे रही है। इन तकनीकों का उद्देश्य सैन्य संचालन को अधिक प्रभावी बनाना और बदलते खतरों के अनुरूप तेजी से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना है।
वायुसेना प्रमुख ने भारतीय वायुसेना के दीर्घकालिक लक्ष्य को विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन से भी जोड़ा। इस लक्ष्य के तहत वायुसेना को आत्मनिर्भर, आधुनिक और विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ काम करने में सक्षम एयरोस्पेस शक्ति के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य देश की सुरक्षा के साथ आर्थिक और रणनीतिक हितों की रक्षा करना है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के आधार पर वायुसेना की तैयारियों, तकनीकी विकास और आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखने पर बल दिया गया है।