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‘ऑपरेशन सिंदूर’ से आतंकियों को मिला स्पष्ट संदेश

 अनिश्चित विश्व व्यवस्था में पारंपरिक तैयारी काफी नहीं शिलांग/नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक स्तर पर लगातार बदल रहे सुरक्षा परिदृश्यों और अनिश्चित विश्व व्यवस्था के बीच भारतीय सेनाओं की अभूतपूर्व क्षमता को रेखांकित किया है। मेघालय के शिलांग स्थित पूर्वी वायु कमान (Eastern Air Command) मुख्यालय में सैनिकों को संबोधित करते हुए […]

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Gauravshali Bharat News
  • June 21, 2026 9:03 am IST, Published 17 seconds ago

 अनिश्चित विश्व व्यवस्था में पारंपरिक तैयारी काफी नहीं

शिलांग/नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक स्तर पर लगातार बदल रहे सुरक्षा परिदृश्यों और अनिश्चित विश्व व्यवस्था के बीच भारतीय सेनाओं की अभूतपूर्व क्षमता को रेखांकित किया है। मेघालय के शिलांग स्थित पूर्वी वायु कमान (Eastern Air Command) मुख्यालय में सैनिकों को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने साफ कहा कि आज के दौर में देश की सुरक्षा के लिए केवल पारंपरिक सैन्य तैयारी काफी नहीं है। हाइब्रिड खतरे, साइबर चुनौतियां, सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) और ड्रोन युद्ध के इस दौर में सेना को तकनीकी रूप से लगातार अपग्रेड होना होगा।

संबोधन के दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष रूप से जिक्र करते हुए दुश्मनों को कड़ा संदेश दिया।

🇮🇳 ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से दुश्मनों और आकाओं को मिला करारा जवाब

रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व और रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती ‘आत्मनिर्भरता’ की वजह से ही ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ऐतिहासिक रूप से सफल रहा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: “ऑपरेशन सिंदूर के जरिए हमने न केवल आतंकवादियों बल्कि सीमा पार बैठे उनके आकाओं को भी स्पष्ट और कड़ा संदेश दे दिया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, अखंडता और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। हमारे रक्षा बलों की क्षमता, सतर्कता और अटूट दृढ़ संकल्प ने दुनिया को भारत की असली और उभरती हुई रणनीतिक ताकत दिखाई है।”

🛡️ आधुनिक युद्ध के दौर में इन 3 स्तंभों पर रहेगा फोकस

रक्षा मंत्री ने उभरते हुए वैश्विक खतरों से निपटने के लिए भारतीय रक्षा बलों के सामने तीन सबसे महत्वपूर्ण अनिवार्यताओं को रखा:

  1. तकनीकी फुर्ती (Technological Agility): सेना को नई तकनीकों और अत्याधुनिक हथियारों को तेजी से अपनाना होगा।

  2. रणनीतिक दूरदर्शिता (Strategic Foresight): भविष्य के खतरों का पहले से सटीक आकलन कर रणनीतियां तैयार करनी होंगी।

  3. संस्थागत नवाचार (Institutional Innovation): तीनों सेनाओं (थल, नभ, जल) के बीच एकीकरण और स्वदेशी सैन्य अनुसंधान को बढ़ावा देना होगा।

उन्होंने जोर दिया कि अपनी शर्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत का ‘आत्मनिर्भर’ बनना सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है।

⛰️ पूर्वोत्तर और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का रणनीतिक महत्व

पूर्वी वायु कमान की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने इसे भारत की पूर्वी सीमा की सुरक्षा का सबसे आवश्यक और अटूट स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि चाहे युद्ध का मैदान हो, सीमा प्रबंधन, विपरीत परिस्थितियों में तैनाती या फिर प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन—पूर्वी वायु कमान ने हमेशा सर्वोच्च व्यावसायिकता और साहस का परिचय दिया है।

  • सुरक्षा का मजबूत गढ़: रक्षा मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर का क्षेत्र केवल हमारी भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा, समृद्धि और रणनीतिक शक्ति का मुख्य प्रवेश द्वार है।

  • एक्ट ईस्ट पॉलिसी: वैश्विक मंच पर भारत का कद जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसके मद्देनजर हमारी ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ में पूर्वोत्तर राज्यों और इस कमान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

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