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कसौली की पहाड़ियों को बचाने के लिए सरकार सख्त, निर्माण पर निगरानी बढ़ेगी

इस प्रक्रिया के तहत निर्माण प्रस्तावों की जांच के बाद ही उन्हें आगे की मंजूरी संबंधी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इससे विभिन्न विभागों से संबंधित भवन परियोजनाओं पर निर्धारित नियमों के अनुसार विचार करने में मदद मिलने की उम्मीद है...

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Gauravshali Bharat News
  • October 25, 2026 8:00 pm IST, Published 2 hours ago

शिमला: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित कसौली की पहाड़ियों और प्राकृतिक पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने निर्माण गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था मजबूत करने का फैसला लिया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुपालन में कसौली योजना क्षेत्र के लिए दो स्तरीय विशेष समितियों का गठन किया गया है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों पर नजर रखना, संबंधित विभागों के बीच तालमेल बढ़ाना और निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

कसौली अपनी प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ी भूगोल और पर्यावरणीय महत्व के लिए जाना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण से पर्यावरण और स्थानीय आधारभूत ढांचे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए योजना क्षेत्र में भवन निर्माण से जुड़े प्रस्तावों की जांच और निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था तैयार की गई है। सरकार की ओर से गठित दोनों समितियां अपने निर्धारित दायित्वों के अनुसार काम करेंगी।

नई व्यवस्था में एक पर्यवेक्षण समिति और दूसरी क्रियान्वयन समिति शामिल होगी। दोनों समितियों की जिम्मेदारी निर्माण से जुड़े मामलों की निगरानी करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने की होगी। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि कसौली योजना क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां निर्धारित नियमों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े निर्देशों के अनुरूप हों।

इस व्यवस्था का आधार एनजीटी का पांच अक्टूबर 2018 का आदेश है। यह आदेश सोसायटी फॉर प्रिजर्वेशन ऑफ कसौली एंड इट्स एनवायरनमेंट (स्पोक) बनाम अन्य के मामले में दिया गया था। राज्य सरकार ने इसी आदेश के अनुपालन में समितियों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अधिसूचना जारी होने के बाद अब समितियों के निर्धारित कार्यों के अनुसार निर्माण प्रस्तावों की जांच और निगरानी की जाएगी।

क्रियान्वयन समिति को सरकारी अस्पतालों, अग्निशमन सेवाओं, स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक सेवाओं और आधारभूत ढांचे से जुड़े भवन निर्माण प्रस्तावों की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। विशेष रूप से ऐसे प्रस्तावों पर ध्यान दिया जाएगा, जिनमें दो मंजिल से अधिक निर्माण की योजना है। समिति इन प्रस्तावों का परीक्षण करेगी और उचित पाए जाने वाले मामलों को आगे विचार के लिए पर्यवेक्षण समिति के समक्ष भेजेगी।

इस प्रक्रिया के तहत निर्माण प्रस्तावों की जांच के बाद ही उन्हें आगे की मंजूरी संबंधी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इससे विभिन्न विभागों से संबंधित भवन परियोजनाओं पर निर्धारित नियमों के अनुसार विचार करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अग्निशमन सेवाओं जैसी आवश्यक सुविधाओं के भवन निर्माण में सुरक्षा, उपयोगिता और क्षेत्रीय नियोजन से जुड़े पहलुओं का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

पर्यवेक्षण समिति की भूमिका इस पूरी व्यवस्था पर निगरानी रखने और संबंधित मामलों पर विचार करने से जुड़ी होगी। क्रियान्वयन समिति द्वारा जांचे गए प्रस्तावों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसके सामने रखा जाएगा। दोनों समितियों के बीच समन्वय से निर्माण संबंधी निर्णयों को अधिक व्यवस्थित बनाने और नियमों के अनुपालन पर ध्यान देने का प्रयास किया जाएगा।कसौली जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों का नियमन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां प्राकृतिक ढलान, भूमि की स्थिति और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर विकास कार्य करना आवश्यक होता है।

भवन निर्माण से जुड़े प्रस्तावों की उचित जांच से क्षेत्रीय नियोजन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में सहायता मिल सकती है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब इन समितियों की कार्यप्रणाली और उनके निर्णयों पर नजर रहेगी। नई व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्माण प्रस्तावों की जांच कितनी व्यवस्थित तरीके से होती है और संबंधित विभाग नियमों का पालन किस तरह सुनिश्चित करते हैं। फिलहाल, एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन में उठाए गए इस कदम को कसौली के पर्यावरण संरक्षण और निर्माण गतिविधियों के नियमन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

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