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अर्धकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा होगी मजबूत, AI कैमरों से होगी निगरानी

एआई तकनीक के इस्तेमाल से घाटों पर भीड़ का घनत्व, कतारों की लंबाई और अधिक भीड़ वाले क्षेत्रों का आकलन करने की सुविधा भी प्रस्तावित है। इससे उन स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां लोगों का दबाव बढ़ रहा हो।

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Gauravshali Bharat News
  • October 25, 2026 8:20 pm IST, Published 1 hour ago

हरिद्वार: अर्धकुंभ के दौरान गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा मजबूत करने और भीड़ की निगरानी बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने की तैयारी की जा रही है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) घाटों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बना रहा है। इस परियोजना के लिए 82.13 लाख रुपये की अनुमानित लागत तय की गई है। इन कैमरों के जरिए घाटों पर लोगों की आवाजाही, भीड़ के दबाव और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

प्रस्तावित व्यवस्था की खास बात यह है कि कैमरे केवल वीडियो रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं रहेंगे। इनमें चेहरे की पहचान, लोगों और वाहनों की पहचान तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश जैसी गतिविधियों का पता लगाने वाली तकनीक भी शामिल होगी। इसके अलावा किसी निर्धारित सीमा को पार करने की स्थिति का पता लगाने और भीड़ की स्थिति का विश्लेषण करने जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। इससे निगरानी करने वाली टीम को घाटों पर बदलते हालात की जानकारी मिलने में सहायता मिल सकती है।

अर्धकुंभ के दौरान हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए घाटों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। सामान्य दिनों में भी गंगा स्नान के लिए यहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं, जबकि पर्वों और विशेष स्नान के अवसरों पर भीड़ काफी बढ़ जाती है। ऐसी परिस्थितियों में घाटों पर सुरक्षित आवाजाही बनाए रखना और किसी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

गंगा घाटों पर कई तरह के जोखिम बने रहते हैं। पानी के तेज बहाव, फिसलन भरी सीढ़ियों, गहरे पानी में चले जाने और भीड़ के दबाव के कारण दुर्घटनाओं की आशंका रहती है। अधिक भीड़ होने पर किसी व्यक्ति के परिवार से बिछड़ने या लापता होने की स्थिति में उसे तलाशना भी मुश्किल हो सकता है। एआई आधारित निगरानी व्यवस्था से इन परिस्थितियों पर नजर रखने और जरूरत के अनुसार संबंधित कर्मचारियों को सतर्क करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

योजना के तहत दो प्रकार के कैमरे लगाए जाने का प्रस्ताव है। इनमें आउटडोर बुलेट कैमरे और पैन-टिल्ट-जूम यानी पीटीजेड कैमरे शामिल हैं। बुलेट कैमरों में रात के समय निगरानी के लिए इन्फ्रारेड तकनीक होगी। इनके लिए 50 से 80 मीटर तक की इन्फ्रारेड क्षमता, मोटर से नियंत्रित होने वाले लेंस और मेमोरी कार्ड की सुविधा निर्धारित की गई है। इन कैमरों को धूल और पानी से बचाव के निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

दूसरी श्रेणी में पीटीजेड कैमरे शामिल होंगे, जिन्हें जरूरत के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकता है। इनमें 33 गुना ऑप्टिकल जूम और 200 मीटर तक की इन्फ्रारेड निगरानी क्षमता का प्रावधान है। इन सुविधाओं के माध्यम से दूर स्थित स्थानों की गतिविधियों को करीब से देखा जा सकेगा। रात के समय निगरानी में भी इन कैमरों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

एआई तकनीक के इस्तेमाल से घाटों पर भीड़ का घनत्व, कतारों की लंबाई और अधिक भीड़ वाले क्षेत्रों का आकलन करने की सुविधा भी प्रस्तावित है। इससे उन स्थानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है, जहां लोगों का दबाव बढ़ रहा हो। ऐसी जानकारी मिलने पर संबंधित टीम भीड़ को व्यवस्थित करने और आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए कदम उठा सकती है।

हालांकि, चेहरे की पहचान और अन्य एआई सुविधाओं के इस्तेमाल के दौरान नागरिकों की निजता का ध्यान रखना भी जरूरी होगा। निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के साथ यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण रहेगा कि कैमरों से प्राप्त जानकारी का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप हो और सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन किया जाए।

फिलहाल, एचआरडीए की इस योजना का उद्देश्य अर्धकुंभ के दौरान घाटों पर निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में सहायता करना है। परियोजना के क्रियान्वयन, कैमरों की स्थापना और संचालन से जुड़ी आगे की जानकारी सामने आने के बाद इसकी वास्तविक कार्यप्रणाली स्पष्ट होगी। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो भीड़ प्रबंधन और आपात स्थितियों में निगरानी टीमों को समय पर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

 

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