नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार को लेकर जारी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अतिरिक्त समय दिया है। अदालत ने इस गुट को निर्वाचन आयोग के समक्ष अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन की मोहलत दी है। इससे पहले जवाब जमा करने की अंतिम तारीख निर्धारित थी, लेकिन ऋतब्रत बनर्जी की ओर से समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने इस मांग का विरोध किया।
यह विवाद पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और उसके पारंपरिक चुनाव चिह्न ‘फूल और घास’ पर अधिकार से जुड़ा है। दोनों पक्ष इन पर अपना दावा कर रहे हैं। मामले में चुनाव आयोग को संबंधित दस्तावेजों और दावों की जांच के बाद निर्णय लेना है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान आयोग से इस विवाद पर तीन महीने के भीतर फैसला करने को कहा था।
ऋतब्रत बनर्जी के गुट ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिन की मोहलत दी। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने समय बढ़ाने की मांग पर आपत्ति जताई। अब ऋतब्रत गुट को निर्धारित अवधि में अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज आयोग के सामने प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद निर्वाचन आयोग दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेगा।
पश्चिम बंगाल में उपचुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले पक्ष को ‘ममता TMC’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का प्रतीक दिया गया था। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक TMC’ नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया गया था। ये व्यवस्थाएं विवाद के अंतिम निपटारे तक दोनों पक्षों की अलग पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थीं।
इस मामले ने उस समय एक नया मोड़ लिया, जब ऋतब्रत बनर्जी ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से उनके महत्वपूर्ण हलफनामों को हासिल करने की कोशिश की गई। ऋतब्रत के अनुसार, ये दस्तावेज निर्वाचन आयोग में जमा किए जाने थे और इनके माध्यम से उनका गुट पार्टी के मूल नाम तथा पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अपना दावा मजबूत करना चाहता है।
ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी दावा किया कि कोलकाता से दिल्ली जा रहे एक ट्रक को लूटने की कोशिश हुई थी। उनके मुताबिक, ट्रक में उनके गुट की ओर से तैयार कराए गए हलफनामे ले जाए जा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उनके समर्थकों ने दस्तावेज छीनने की कोशिश को विफल कर दिया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना के संबंध में आधिकारिक जांच की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है। इन दावों को फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी के पक्ष की ओर से लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर चल रहा विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी की आधिकारिक पहचान से जुड़े फैसले का असर दोनों गुटों की राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। निर्वाचन आयोग के निर्णय से यह तय करने में मदद मिलेगी कि संबंधित नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अधिकार किस पक्ष को मिलेगा।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट से अतिरिक्त समय मिलने के बाद ऋतब्रत बनर्जी के गुट को अपना जवाब दाखिल करना है। इसके बाद निर्वाचन आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेजों, दावों और आपत्तियों पर विचार करेगा। अब इस मामले में आयोग के अंतिम फैसले और उससे पहले होने वाली कानूनी कार्यवाही पर सबकी नजरें रहेंगी।