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हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी पड़ी भारी,मुख्य सचिव पर एक लाख जुर्माना

मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिए जाने के बाद अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत उनके जवाब और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है। सरकार को यह बताना होगा कि...

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  • October 27, 2026 2:30 pm IST, Published 2 hours ago

चंडीगढ़: महंगाई भत्ते (DA) से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेशों पर समय पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने मामले में जवाब दाखिल नहीं किए जाने पर नाराजगी जताते हुए पंजाब के मुख्य सचिव पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। साथ ही, मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया गया है कि पूर्व में जारी आदेशों का पालन करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

यह मामला हाईकोर्ट के आदेशों के कथित अनुपालन न होने को लेकर दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पंजाब सरकार की ओर से अपेक्षित जवाब दाखिल नहीं किया गया था। इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए जुर्माना लगाने का फैसला सुनाया। करीब एक घंटे तक चली सुनवाई में न्यायिक आदेशों का पालन करने और अदालत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

अदालत ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह तीन नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर स्वयं उपस्थित रहें। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि DA से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। इसके अलावा, यदि आदेशों को लागू करने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, तो सरकार को यह भी बताना होगा कि उन्हें पूरा करने में कितना समय लगेगा।

महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई के प्रभाव से राहत देने के लिए दिया जाता है। डीए से जुड़े विवादों में अक्सर इसकी गणना, भुगतान, बकाया राशि और सरकारी आदेशों के क्रियान्वयन जैसे मुद्दे शामिल होते हैं। इस मामले में भी अदालत के पूर्व निर्देशों के पालन को लेकर विवाद सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित डीए विवाद की पूरी पृष्ठभूमि, याचिकाकर्ताओं की विस्तृत मांग और बकाया राशि का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।

अवमानना याचिका का उद्देश्य अदालत के पहले से जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित कराना है। जब किसी पक्ष पर न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाया जाता है, तो अदालत संबंधित पक्ष से जवाब मांग सकती है और अनुपालन की स्थिति की समीक्षा कर सकती है। इस मामले में जवाब दाखिल नहीं किए जाने के कारण अदालत ने पंजाब सरकार के प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने की दिशा में सख्ती दिखाई है। मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिए जाने के बाद अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत उनके जवाब और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है।

सरकार को यह बताना होगा कि आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है और अनुपालन की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी। हाईकोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि न्यायिक आदेशों के पालन से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। एक लाख रुपये का जुर्माना और मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश इसी मामले में अदालत की नाराजगी को दर्शाता है। अब तीन नवंबर को होने वाली सुनवाई में पंजाब सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब और आदेशों के अनुपालन की स्थिति पर नजर रहेगी।

 

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