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फहीम खान की रिहाई पर पेच, सरकार ने हाई कोर्ट से मांगे आठ सप्ताह

इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका और हाई कोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करेगी। राज्य सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत सरकार के अनुरोध पर क्या रुख अपनाती है और फहीम खान की समय...

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  • October 30, 2026 7:40 pm IST, Published 2 hours ago

रांची: झारखंड हाई कोर्ट में धनबाद के वासेपुर निवासी गैंगस्टर फहीम खान की समय पूर्व रिहाई से जुड़े मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन के लिए उसे अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। सरकार की ओर से इस संबंध में आठ सप्ताह का समय देने का अनुरोध किया गया। साथ ही अदालत को जानकारी दी गई कि हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

यह मामला फहीम खान की समय से पहले जेल से रिहाई की मांग से जुड़ा है। फहीम खान के पक्ष की ओर से अदालत में यह मुद्दा उठाया गया है कि पूर्व में दिए गए न्यायिक आदेश के बावजूद राज्य सरकार की ओर से निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अवमानना याचिका दाखिल की गई है। याचिका में अदालत के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने पक्ष में बताया कि मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी है। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के कारण सरकार ने फिलहाल अनुपालन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है। सरकार का कहना है कि शीर्ष अदालत में मामला विचाराधीन होने के मद्देनजर आगे की कार्रवाई के लिए समय दिया जाना चाहिए। फहीम खान का नाम धनबाद के वासेपुर इलाके में लंबे समय से अपराध जगत से जुड़ा रहा है। उसके खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों को लेकर चर्चा होती रही है। वासेपुर और आसपास के क्षेत्रों में उसका प्रभाव भी कई बार सुर्खियों में रहा है। यही वजह है कि उसकी समय पूर्व रिहाई से जुड़ा मामला कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समय पूर्व रिहाई का प्रावधान जेल में बंद कैदियों को निर्धारित शर्तों और कानूनी नियमों के तहत सजा की पूरी अवधि समाप्त होने से पहले मुक्त करने की अनुमति देता है। हालांकि, इसके लिए कैदी का आचरण, जेल में बिताई गई अवधि, अपराध की प्रकृति और संबंधित नियमों को ध्यान में रखा जाता है। ऐसे मामलों में राज्य सरकार की संबंधित समितियां और सक्षम अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत निर्णय लेते हैं। फहीम खान के मामले में भी समय पूर्व रिहाई की मांग को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी है। हाई कोर्ट में दाखिल अवमानना याचिका का मुख्य आधार अदालत के पूर्व आदेश का कथित तौर पर पालन नहीं होना है। याचिकाकर्ता की ओर से इस विषय पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।

राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मामला अब दो न्यायिक स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ हाई कोर्ट में आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शीर्ष अदालत में सरकार ने पूर्व आदेश को चुनौती दी है। इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका और हाई कोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करेगी। राज्य सरकार ने आठ सप्ताह का समय मांगा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत सरकार के अनुरोध पर क्या रुख अपनाती है और फहीम खान की समय पूर्व रिहाई से जुड़े मामले में आगे क्या कानूनी फैसला सामने आता है।

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