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झारखंड हाई कोर्ट सख्त, चार महीने में रेलवे अंडरपास पूरा करने का निर्देश

मामले में रेलवे अधिकारियों को अपने निर्देशों के अनुपालन के संबंध में शपथपत्र दाखिल करना होगा। अदालत ने इसके लिए 12 मार्च 2027 तक की समयसीमा निर्धारित की है। इसके बाद 18 मार्च 2027 को मामले की दोबारा सुनवाई होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि दिए गए निर्देशों पर कितना काम हुआ है। खंडपीठ ने अनुपालन की समीक्षा के लिए...

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  • October 22, 2026 1:28 pm IST, Published 33 minutes ago

रांची: झारखंड के पलामू जिले में रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को होने वाली परेशानी को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने रेलवे को जरूरी निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि यदि विश्रामपुर प्रखंड के लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच निर्माणाधीन रेलवे अंडरपास का काम अभी अधूरा है, तो उसे चार महीने के भीतर पूरा किया जाए। साथ ही, बरसात के मौसम में अंडरपास में पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान निकालने को भी कहा गया है, ताकि लोगों को जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार न करनी पड़े।

मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने लालगढ़ वेलफेयर सोसाइटी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। याचिका में ग्रामीणों के आवागमन की समस्या उठाते हुए रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) या मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग बनाने की मांग की गई थी। ग्रामीणों का कहना था कि मौजूदा व्यवस्था उनके लिए परेशानी का कारण बनी हुई है और बारिश के दौरान स्थिति अधिक कठिन हो जाती है।

अदालत ने अंडरपास को जल्द पूरा करने और जलभराव की समस्या दूर करने पर जोर दिया, लेकिन रेलवे ओवरब्रिज या मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग बनाने का सीधा आदेश देने से इनकार कर दिया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह के निर्माण की जरूरत, तकनीकी उपयुक्तता और व्यवहार्यता का आकलन करना संबंधित विशेषज्ञों और विभागों का काम है। इसलिए अदालत ने रेलवे को मौजूदा अंडरपास की व्यवस्था बेहतर बनाने के निर्देश दिए।

मामले में रेलवे अधिकारियों को अपने निर्देशों के अनुपालन के संबंध में शपथपत्र दाखिल करना होगा। अदालत ने इसके लिए 12 मार्च 2027 तक की समयसीमा निर्धारित की है। इसके बाद 18 मार्च 2027 को मामले की दोबारा सुनवाई होगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि दिए गए निर्देशों पर कितना काम हुआ है। खंडपीठ ने अनुपालन की समीक्षा के लिए मामला सूचीबद्ध करते हुए जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया।

सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से बताया गया कि लालगढ़ बिहार रेलवे स्टेशन और पांजरिकला गांव के बीच ग्रामीण लंबे समय से सुरक्षित तरीके से रेलवे लाइन पार करने की सुविधा की मांग कर रहे हैं। रेलवे के मुताबिक, इस स्थान पर कुछ लोग अनधिकृत तरीके से पटरियां पार करते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रेलवे ने अदालत को यह भी बताया कि मौजूदा नीति के तहत नई रेलवे क्रॉसिंग खोलने की व्यवस्था नहीं है। दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के उद्देश्य से पुरानी क्रॉसिंग को भी चरणबद्ध तरीके से बंद कर वहां जरूरत के अनुसार अंडरपास या ओवरब्रिज जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

रेलवे ने ओवरब्रिज बनाने की मांग पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार की ओर से खर्च में हिस्सेदारी को लेकर सहमति नहीं मिली है। इसके अलावा, रेलवे के अनुसार संबंधित स्थान पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए निर्धारित मानक भी पूरे नहीं होते। इन्हीं कारणों से रेलवे ने वहां ओवरब्रिज या नई मानवयुक्त क्रॉसिंग बनाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि अंडरपास का निर्माण ग्रामीणों की सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाएगा। बरसात के दिनों में इसमें पानी भर जाता है, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों के सामने जलभराव वाले अंडरपास से गुजरने या जोखिम उठाकर रेलवे ट्रैक पार करने का विकल्प रह जाता है। इसी समस्या को देखते हुए याचिकाकर्ता ने ओवरब्रिज बनाने की मांग की थी।

हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद अब रेलवे के सामने अंडरपास का निर्माण पूरा करने और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की जिम्मेदारी है। इस मामले में अगली सुनवाई मार्च 2027 में होगी। उस दौरान रेलवे की ओर से दाखिल अनुपालन शपथपत्र के आधार पर आगे की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने और स्कूली बच्चों को जोखिम से बचाने के लिहाज से इस मामले पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।

 

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