नयी दिल्लीः भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के संकल्प को दोहराते हुए राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में भव्य ‘एकता दौड़’ का आयोजन किया गया। मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एकता दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों, युवाओं और नागरिकों ने हिस्सा लेकर राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों ने देश की विविधता में एकता की भावना को मजबूत करने और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। एकता दौड़ केवल एक खेल आयोजन या प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के नागरिकों को एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ने का माध्यम भी बनी। इसमें शामिल लोगों ने संदेश दिया कि भारत की असली ताकत उसकी एकजुटता, सांस्कृतिक विविधता और आपसी सद्भाव में निहित है। राष्ट्रीय एकता दिवस प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में सरदार पटेल का योगदान असाधारण रहा है। आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विभिन्न रियासतों को एक राष्ट्रीय व्यवस्था के अंतर्गत लाना था। उस दौर में भारत अनेक रियासतों और अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित था।
ऐसे समय में सरदार पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ, दृढ़ इच्छाशक्ति और कूटनीतिक कौशल का परिचय देते हुए रियासतों के एकीकरण का ऐतिहासिक कार्य किया। उनके प्रयासों ने आधुनिक भारत की भौगोलिक और राजनीतिक एकता की नींव मजबूत की। उन्होंने यह साबित किया कि मजबूत नेतृत्व, दूरदर्शिता और राष्ट्रीय हित के प्रति समर्पण से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है। यही कारण है कि सरदार पटेल का जीवन आज भी देश के युवाओं के लिए त्याग, अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा बना हुआ है।कार्यक्रम में शामिल लोगों ने इस ऐतिहासिक विरासत को आगे बढ़ाने और देश की एकता को मजबूत रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि सरदार पटेल ने जिस एकजुट भारत का सपना साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसे सुरक्षित, सशक्त और विकसित बनाना वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
देश की सीमाओं की सुरक्षा से लेकर आंतरिक सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण तक, राष्ट्रीय एकता का भाव हर नागरिक के व्यवहार और कर्तव्य में दिखाई देना चाहिए। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और सांसद बांसुरी स्वराज सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। सभी ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता के महत्व पर जोर दिया। राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व केवल किसी महान व्यक्तित्व को याद करने तक सीमित नहीं है। यह दिन हमें अपने राष्ट्रीय दायित्वों का एहसास कराता है। भाषा, क्षेत्र, जाति और संस्कृति की विविधताओं के बावजूद भारत एक साझा पहचान से जुड़ा हुआ है।

इस पहचान को मजबूत बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। एकता दौड़ में लोगों की भागीदारी इसी भावना का प्रतीक बनी।आज जब देश विकास, सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए दौर में आगे बढ़ रहा है, तब राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। आपसी विश्वास, सामाजिक समरसता और सामूहिक प्रयासों के बिना किसी भी राष्ट्र की प्रगति अधूरी है। सरदार पटेल की विरासत हमें यही सिखाती है कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है, जब उसके नागरिक व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता दें। नई दिल्ली में आयोजित एकता दौड़ ने एक बार फिर इस विचार को रेखांकित किया कि भारत की शक्ति उसकी एकजुटता में है। सरदार पटेल के आदर्शों को आत्मसात करते हुए देश को मजबूत, सुरक्षित और विकसित बनाने का संकल्प ही राष्ट्रीय एकता दिवस की सबसे सार्थक अभिव्यक्ति है।