दरअसल, किसी बंदी की रिहाई के लिए अदालत से आदेश जारी होने के बाद भी कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं। इसमें अदालत का परवाना जेल तक पहुंचना, दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित रिकॉर्ड की जांच शामिल होती है। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ किसी अन्य मामले में हिरासत या गिरफ्तारी का आदेश लंबित तो नहीं है। इन औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही जेल प्रशासन रिहाई की कार्रवाई करता है।
आजम खां उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं और रामपुर की राजनीति में उनका महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। उन्होंने प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है। रामपुर विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक और रामपुर लोकसभा सीट से सांसद रहने के कारण उनकी पहचान प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में होती रही है। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम भी राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वह स्वार विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। हालांकि, विभिन्न कानूनी मामलों के चलते पिता और बेटे दोनों को लंबे समय से अदालतों और जेल से जुड़ी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ा है।
आजम खां और अब्दुल्ला आजम की रिहाई को लेकर उनके समर्थकों में भी उत्सुकता बनी हुई है। रामपुर में इस घटनाक्रम पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। दोनों नेताओं के जेल से बाहर आने के बाद उनकी आगे की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर भी नजरें रहेंगी। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने श्योरिटी बॉन्ड स्वीकार करने के बाद रिलीज ऑर्डर जारी कर दिया है। उनके वकील जुबैर अहमद के मुताबिक, कोर्ट ने जेल प्रशासन को रिहाई का परवाना भेज दिया है। अब जेल प्रशासन अपने स्तर पर जरूरी दस्तावेजों और कानूनी औपचारिकताओं की जांच कर रहा है।
हालांकि, वास्तविक रिहाई का समय जेल प्रशासन की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा। यदि किसी अन्य मामले में कोई कानूनी अड़चन नहीं आती है तो दोनों की रिहाई का रास्ता खुल सकता है। रामपुर की राजनीति के लिहाज से भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आजम खां और अब्दुल्ला आजम की रिहाई से समाजवादी पार्टी के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा शुरू हो सकती है। अब सभी की निगाहें जेल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद दोनों नेताओं की रिहाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।