गाजीपुर की बेटी श्रीनी ने संभाली वंदे भारत स्लीपर की कमान

वाराणसी/गाजीपुर। भारतीय रेलवे के इतिहास में 31 अक्टूबर 2026 का दिन महिला सशक्तीकरण और आधुनिक रेल संचालन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के लिहाज से खास बन गया। वाराणसी से नई दिल्ली के बीच देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस की शुरुआत के अवसर पर पूर्वांचल की बेटी श्रीनी श्रीवास्तव को ट्रेन के संचालन […]

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  • November 1, 2026 9:59 pm IST, Published 1 hour ago

वाराणसी/गाजीपुर। भारतीय रेलवे के इतिहास में 31 अक्टूबर 2026 का दिन महिला सशक्तीकरण और आधुनिक रेल संचालन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के लिहाज से खास बन गया। वाराणसी से नई दिल्ली के बीच देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस की शुरुआत के अवसर पर पूर्वांचल की बेटी श्रीनी श्रीवास्तव को ट्रेन के संचालन दल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। गाजीपुर जिले की रहने वाली श्रीनी ने सहायक लोको पायलट के रूप में इस आधुनिक ट्रेन के संचालन में अपनी भूमिका निभाई। उनकी इस उपलब्धि से गाजीपुर, वाराणसी और पूरे पूर्वांचल में खुशी और गर्व का माहौल है।

वंदे भारत स्लीपर जैसी आधुनिक ट्रेन के परिचालन दल में शामिल होना किसी भी रेलकर्मी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। श्रीनी श्रीवास्तव का इस जिम्मेदारी के लिए चयन यह दर्शाता है कि भारतीय रेलवे में महिलाएं अब तकनीकी और परिचालन से जुड़े महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। उनकी सफलता उन युवतियों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो रेलवे में अपना करियर बनाने और परंपरागत रूप से पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में आगे बढ़ने का सपना देखती हैं।

गाजीपुर के सरैया से शुरू हुआ सफलता का सफर

श्रीनी श्रीवास्तव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सरैया की रहने वाली हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा और उच्च शिक्षा गाजीपुर से ही पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय रेलवे में नौकरी पाने का लक्ष्य निर्धारित किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट गईं।

लगातार मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर वर्ष 2017 में उनका चयन भारतीय रेलवे में सहायक लोको पायलट (ALP) के पद पर हुआ। यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव था। रेलवे में चयन के बाद उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए तकनीकी प्रशिक्षण और परिचालन संबंधी अनुभव हासिल किया।

रेलवे में सहायक लोको पायलट का कार्य केवल ट्रेन के संचालन में सहयोग करना नहीं होता, बल्कि इसमें सतर्कता, तकनीकी समझ, अनुशासन और सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। रेल परिचालन के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। ऐसे में इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए लगातार एकाग्रता और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

वंदे भारत स्लीपर के 13 सदस्यीय क्रू में सात महिलाएं

वाराणसी से नई दिल्ली के बीच शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस का उद्घाटन परिचालन कई मायनों में खास रहा। इस ट्रेन के संचालन और यात्रियों को सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कुल 13 सदस्यीय क्रू की तैनाती की गई। उल्लेखनीय बात यह रही कि इस दल में सात महिला कर्मचारी शामिल थीं।

इस टीम में सहायक लोको पायलट के रूप में श्रीनी श्रीवास्तव को जिम्मेदारी दी गई, जबकि मुख्य लोको पायलट की भूमिका जौनपुर निवासी हरिशंकर यादव ने संभाली। ट्रेन में गार्ड की जिम्मेदारी ज्योति को सौंपी गई। इसके अतिरिक्त टिकट जांच और यात्रियों से जुड़ी सेवाओं के लिए पांच महिला टीटीई की तैनाती भी की गई।

इस प्रकार कुल 13 सदस्यों वाले परिचालन दल में सात महिलाओं की भागीदारी ने इस शुरुआत को विशेष पहचान दी। यह केवल एक ट्रेन के संचालन तक सीमित उपलब्धि नहीं है, बल्कि रेलवे की विभिन्न जिम्मेदारियों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उदाहरण है।

पहले भी वंदे भारत ट्रेन चला चुकी हैं श्रीनी

श्रीनी श्रीवास्तव के लिए वंदे भारत ट्रेन का परिचालन कोई बिल्कुल नया अनुभव नहीं है। इससे पहले भी वह वाराणसी से नई दिल्ली के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के संचालन से जुड़ी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं।

वर्ष 2024 में भी उनकी उपलब्धि चर्चा में आई थी, जब उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया था। उस समय वह वाराणसी रेल मंडल में सहायक लोको पायलट के रूप में कार्यरत थीं। अपने करियर के शुरुआती दौर में ही वंदे भारत ट्रेन के परिचालन से जुड़ना उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही थी।

अब स्लीपर वंदे भारत के परिचालन दल में शामिल होकर उन्होंने अपने अनुभव और कार्यक्षमता को एक और महत्वपूर्ण अवसर से जोड़ा है। यह उनके लंबे कार्यकाल, मेहनत और पेशेवर प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

आधुनिक रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भूमिका

भारतीय रेलवे में महिलाओं की भूमिका लगातार व्यापक हो रही है। पहले जहां रेलवे में महिलाओं की उपस्थिति मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा विभागों तक अधिक दिखाई देती थी, वहीं अब वे ट्रेन संचालन, तकनीकी कार्यों, सुरक्षा, टिकट जांच और अन्य परिचालन जिम्मेदारियों में भी सक्रिय योगदान दे रही हैं।

वंदे भारत स्लीपर के उद्घाटन परिचालन में सात महिला कर्मचारियों की भागीदारी इसी बदलाव का उदाहरण है। महिला सहायक लोको पायलट, महिला गार्ड और महिला टीटीई की मौजूदगी यह संदेश देती है कि योग्यता, प्रशिक्षण और मेहनत के आधार पर महिलाएं हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं।

हालांकि, रेलवे में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ उनके लिए बेहतर कार्यस्थल, सुरक्षित वातावरण, प्रशिक्षण और समान अवसर उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इस दिशा में ऐसी उपलब्धियां नई पीढ़ी की युवतियों को आगे आने के लिए प्रोत्साहित कर सकती हैं।

यात्रियों के लिए भी खास है वाराणसी-दिल्ली स्लीपर ट्रेन

वाराणसी और नई दिल्ली के बीच शुरू की गई वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस लंबी दूरी की रात्रिकालीन रेल यात्रा को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस ट्रेन में यात्रियों को आरामदायक वातानुकूलित स्लीपर यात्रा का विकल्प मिलेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 कोच वाली इस ट्रेन में कुल 823 बर्थ की व्यवस्था है। इसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी के वातानुकूलित कोच शामिल हैं। ट्रेन वाराणसी से रात 8:50 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 6:10 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। वापसी में नई दिल्ली से रात 9:40 बजे प्रस्थान कर अगले दिन सुबह 7:10 बजे वाराणसी पहुंचने का समय निर्धारित किया गया है।

इस मार्ग पर प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद जैसे प्रमुख स्टेशनों पर ठहराव की व्यवस्था बताई गई है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह सेवा यात्रियों को रात में सफर करके सुबह अपने गंतव्य तक पहुंचने का विकल्प उपलब्ध कराएगी।

बेटियों के सपनों को मिली नई उड़ान

श्रीनी श्रीवास्तव की उपलब्धि का महत्व केवल उनके व्यक्तिगत करियर तक सीमित नहीं है। यह उन हजारों युवतियों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर बड़े संस्थानों में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं।

गाजीपुर जैसे जिले से निकलकर भारतीय रेलवे में सहायक लोको पायलट बनना और फिर देश की आधुनिक स्लीपर वंदे भारत ट्रेन के परिचालन दल का हिस्सा बनना उनकी मेहनत और समर्पण की कहानी है।

उनकी सफलता यह संदेश देती है कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी चीज प्रतिभा, मेहनत, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास है। अवसर मिलने पर महिलाएं भी तकनीकी और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को पूरी दक्षता के साथ निभा सकती हैं।

वंदे भारत स्लीपर के उद्घाटन परिचालन में श्रीनी श्रीवास्तव की भागीदारी ने गाजीपुर की पहचान को एक नई उपलब्धि से जोड़ा है। पूर्वांचल की इस बेटी की सफलता निश्चित रूप से उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी, जो भारतीय रेलवे में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।

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