प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में कायस्थ समाज के तत्वावधान में भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की भव्य शोभायात्रा श्रद्धा, उत्साह और उल्लास के साथ निकाली गई। शोभायात्रा में कायस्थ समाज के लोगों के साथ-साथ अन्य समाजों के श्रद्धालुओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। भगवान चित्रगुप्त महाराज के जयकारों से पूरा शहर भक्तिमय नजर आया। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर भगवान के दर्शन करते रहे और जगह-जगह उनका स्वागत किया गया।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के साथ कायस्थ समाज को एक मंच पर एकजुट करना रहा। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ लोगों, युवाओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की शोभायात्रा रविवार, 01 नवंबर को प्रातः 11 बजे मेजर रंजीत सिंह स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, कायस्थ पाठशाला से प्रारंभ हुई। जगदीश श्याम चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक सदस्य एवं पूर्व प्रशासनिक अधिकारी धीरज श्रीवास्तव की अगुवाई में आयोजित इस यात्रा में कायस्थ एकता संकल्प का संदेश प्रमुखता से दिखाई दिया।
शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए सिविल लाइंस, पत्थर गिरिजाघर और हाईकोर्ट क्षेत्र से होकर गुजरी। इसके बाद यात्रा पुनः कायस्थ पाठशाला पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। विभिन्न वाहनों के साथ भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज का भव्य रथ शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रहा।
रथ पर विराजमान भगवान चित्रगुप्त महाराज के दर्शन के लिए लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह भगवान के जयकारे लगाए। कई स्थानों पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। शोभायात्रा में शामिल लोगों ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता का भी परिचय दिया।
शोभायात्रा के दौरान भगवान चित्रगुप्त महाराज के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। रथ के साथ चल रहे श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ धार्मिक उद्घोष करते नजर आए। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
इस अवसर पर केवल कायस्थ समाज के लोग ही नहीं, बल्कि अन्य समाजों के लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इससे सामाजिक सद्भाव और आपसी सहयोग की भावना को मजबूती मिली।
भगवान चित्रगुप्त को ज्ञान, लेखन, न्याय और कर्मों के लेखा-जोखा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वह मनुष्य के कर्मों का लेखा रखने वाले देवता हैं। कायस्थ समाज में भगवान चित्रगुप्त की विशेष आराधना की जाती है। यही कारण है कि उनकी शोभायात्रा को धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक परंपरा से जोड़कर भी देखा जाता है।
शोभायात्रा में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी धीरज श्रीवास्तव की मौजूदगी और सक्रिय भूमिका लोगों के बीच विशेष चर्चा का विषय रही। प्रयागराज के मूल निवासी धीरज श्रीवास्तव राजस्थान कैडर के प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र में रहा जुड़ाव भी इस आयोजन के दौरान चर्चा में रहा।
धीरज श्रीवास्तव यूपीए चेयरपर्सन रहीं सोनिया गांधी के लंबे समय तक ओएसडी के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर प्रियंका गांधी के निजी सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई।
वर्ष 2019 में प्रियंका गांधी की चर्चित गंगा जल यात्रा के आयोजन और रणनीतिक रूपरेखा में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। इस यात्रा को लेकर उस समय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा हुई थी।
प्रयागराज से अपने विशेष लगाव के चलते धीरज श्रीवास्तव अपने सेवाकाल के दौरान भी शहर के विकास से जुड़े विषयों में रुचि लेते रहे। जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) जैसी विकास योजनाओं के अंतर्गत प्रयागराज नगर निगम को विशेष सूची में शामिल कराने और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया जाता रहा है।
धीरज श्रीवास्तव की सामाजिक सक्रियता और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए प्रयागराज के राजनीतिक गलियारों में भी उनकी संभावित भूमिका को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। विशेष रूप से कायस्थ मतदाताओं की उल्लेखनीय उपस्थिति वाली विधानसभा सीटों पर उन्हें एक संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर उनकी उम्मीदवारी के संबंध में अभी किसी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में राजनीतिक हलकों में चल रही इन चर्चाओं को फिलहाल संभावनाओं और अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
शोभायात्रा में उनकी सक्रिय भागीदारी को सामाजिक संपर्क और कायस्थ समाज के बीच एकजुटता के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। धार्मिक आयोजन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद स्थापित करने का अवसर भी मिला।
भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की भव्य शोभायात्रा को सफल बनाने में टी.पी. सिंह, धीरज श्रीवास्तव, समीर शंकर, कौशलेंद्र नाथ सिंह, प्रवीण श्रीवास्तव धुन्नू सहित अन्य सहयोगियों की विशेष भूमिका रही।
आयोजन से जुड़े लोगों ने व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित करने में सक्रिय योगदान दिया। शोभायात्रा के सफल समापन के साथ ही आयोजकों ने सामाजिक एकता और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
कुल मिलाकर प्रयागराज में निकली भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की यह शोभायात्रा धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और कायस्थ एकता का संदेश देने में सफल रही। भगवान के जयकारों के बीच संपन्न हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।