चंडीगढ़: पंजाब के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए महंगाई भत्ते (DA) के बकाया भुगतान का इंतजार अभी लंबा हो सकता है। राज्य सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्वीकार किया है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए तथा महंगाई राहत (DR) का बकाया हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सरकार के मुताबिक, एक जुलाई 2021 से 30 सितंबर 2026 तक की अवधि का कुल बकाया करीब 22,818 करोड़ रुपये है। इसके अलावा यदि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान दर से महंगाई भत्ता दिया जाता है तो राज्य के खजाने पर हर साल 4,712 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों वित्तीय दायित्वों को मिलाकर पंजाब सरकार की कुल लंबित देनदारी लगभग 32,418 करोड़ रुपये हो जाती है। सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी स्वीकार किया है कि हाई कोर्ट के तीन अगस्त के आदेश का पालन करना उसकी जिम्मेदारी है। इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई गई है। ऐसे में राज्य सरकार को अदालत के निर्देशों के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान की व्यवस्था करनी होगी।
हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सरकार को डीए और डीआर का बकाया छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ चुकाना होगा। मुख्य सचिव ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि सरकार इस वित्तीय देनदारी को स्वीकार करती है। यानी भुगतान में देरी होने के बावजूद कर्मचारियों को बकाया राशि के साथ निर्धारित ब्याज देने की जिम्मेदारी सरकार पर बनी हुई है। सरकारी खजाने की स्थिति को देखते हुए यह भुगतान राज्य के लिए बड़ी वित्तीय चुनौती माना जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पंजाब सरकार ने वेतन और पेंशन पर करीब 58,064 करोड़ रुपये खर्च किए। ऐसे में हजारों करोड़ रुपये के लंबित डीए भुगतान के लिए बजट में अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है। इसका असर सरकार की अन्य विकास योजनाओं और वित्तीय प्राथमिकताओं पर भी पड़ सकता है।
इस बीच सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत देने के लिए महंगाई भत्ते की दर में आठ प्रतिशत की वृद्धि भी की थी। हलफनामे के अनुसार, 18 सितंबर को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस संबंध में फैसला लिया गया। इसके बाद 23 सितंबर को वित्त विभाग ने आदेश जारी करते हुए डीए की दर 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी। नई दर एक सितंबर 2026 से लागू की गई। बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ सितंबर के वेतन और पेंशन के साथ अक्टूबर में दिया गया।
हालांकि, यह वृद्धि पुराने बकाया भुगतान से अलग है। कर्मचारियों और पेंशनरों की मांग है कि लंबे समय से लंबित डीए और डीआर का भुगतान भी जल्द किया जाए। सरकार की ओर से अदालत में स्वीकार की गई देनदारी ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। दूसरी तरफ, पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के तीन अगस्त के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसके लिए एक सितंबर को विशेष अनुमति याचिका दाखिल की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ प्रक्रियागत कमियां बताई थीं। इसके बाद सरकार ने एक अक्टूबर को संशोधित प्रक्रिया के तहत याचिका दोबारा दाखिल की।
सरकार ने अदालत में यह भी दलील दी कि भुगतान में हुई देरी जानबूझकर आदेशों की अवहेलना करने के उद्देश्य से नहीं की गई। राज्य सरकार का कहना है कि उसने कानूनी प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। साथ ही उसने हाई कोर्ट के निर्देशों और छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ बकाया भुगतान की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया है। अब कर्मचारियों और पेंशनरों की नजर हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंजाब सरकार इतनी बड़ी लंबित राशि का भुगतान कब और किस वित्तीय व्यवस्था के तहत करेगी। फिलहाल सरकार के हलफनामे से यह स्पष्ट है कि डीए और डीआर का बकाया राज्य के लिए बड़ा आर्थिक दायित्व बन चुका है।