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हवाई किराए में 700 फीसदी बढ़ोतरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

भारत में 1994 से विमानन कंपनियों को टिकटों का किराया स्वयं निर्धारित करने की स्वतंत्रता मिली हुई है। कंपनियां यात्रियों की मांग, उपलब्ध सीटों और परिचालन लागत के आधार पर कीमतें तय करती हैं। त्योहारों, छुट्टियों और विशेष अवसरों पर मांग बढ़ने के कारण टिकटों के दाम में तेजी से...

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Supreme Court
Gauravshali Bharat News
  • November 2, 2026 2:30 pm IST, Published 2 hours ago

नयी दिल्लीः त्योहारों के सीजन में हवाई टिकटों की कीमतों में भारी उछाल ने आम यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। कई रूटों पर हवाई किराया सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना तक महंगा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ मामलों में टिकटों के दाम 700 प्रतिशत तक बढ़ने का मुद्दा भी उठाया गया है। इसी मामले को लेकर सोमवार, 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिलचस्प स्थिति देखने को मिली। महंगे हवाई किराए पर याचिकाकर्ता की दलीलों के बीच न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की टिप्पणी ने सबका ध्यान खींचा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि हवाई टिकटों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी आम लोगों के अधिकारों और संविधान के अनुच्छेद 14 के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने हवाई यात्रा को आवश्यक सेवा बताते हुए कहा कि मनमाने किराए से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हवाई यात्रा मत कीजिए। वकील ने जब अपनी बात आगे रखने की कोशिश की तो न्यायमूर्ति ने दोबारा यही बात कही और इसके बाद अगला मामला सुनने के लिए कह दिया।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी से जुड़ा मामला पहले से विचाराधीन है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की है। साथ ही केंद्र सरकार को तब तक हवाई किराए को लेकर नए नियम अदालत के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इस बीच सरकार ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 के तहत किराया निर्धारण और निगरानी से जुड़े नए प्रावधान अधिसूचित कर दिए हैं। सरकार की ओर से बनाए गए नए नियमों का उद्देश्य हवाई किराए में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और असाधारण परिस्थितियों में यात्रियों के हितों की रक्षा करना है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी विशेष परिस्थिति में सरकार को लगता है कि आम जनता के हित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह एयरलाइंस को किराए में बदलाव करने का निर्देश दे सकती है। हालांकि, ऐसी कार्रवाई असाधारण परिस्थितियों में और निर्धारित अवधि के लिए ही की जा सकेगी।

नए नियमों के नियम 192 के तहत नियमित उड़ानें संचालित करने वाली विमानन कंपनियों को किराया तय करते समय परिचालन लागत और अन्य संबंधित पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। एयरलाइंस को अपने किराये से जुड़ी पूरी जानकारी नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को उपलब्ध करानी होगी। इससे किराया निर्धारण की प्रक्रिया पर नियामक संस्था की निगरानी मजबूत होने की उम्मीद है। नए प्रावधानों में यात्रियों के लिए भी कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं की गई हैं। अब एयरलाइंस को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर टिकटों की कीमत स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। टिकट बुकिंग के समय यात्रियों को यह जानकारी भी देनी होगी कि उन्हें कुल कितनी रकम चुकानी है। इसके साथ ही मूल किराया, विभिन्न कर, अन्य शुल्क और टिकट रद्द कराने पर लगने वाले चार्ज का अलग-अलग विवरण दिखाना होगा। इससे टिकट बुक करते समय छिपे हुए शुल्क और अंतिम भुगतान को लेकर होने वाली परेशानी कम हो सकती है।

दरअसल, भारत में 1994 से विमानन कंपनियों को टिकटों का किराया स्वयं निर्धारित करने की स्वतंत्रता मिली हुई है। कंपनियां यात्रियों की मांग, उपलब्ध सीटों और परिचालन लागत के आधार पर कीमतें तय करती हैं। त्योहारों, छुट्टियों और विशेष अवसरों पर मांग बढ़ने के कारण टिकटों के दाम में तेजी से उछाल देखने को मिलता है। इससे पहले 1937 के विमानन नियमों के तहत DGCA को कुछ परिस्थितियों में किराये के मामले में हस्तक्षेप करने की शक्ति प्राप्त थी। नए नियमों में सरकार के लिए असाधारण परिस्थितियों में हस्तक्षेप करने का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य विमानन कंपनियों के व्यावसायिक हितों और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन बनाना है।

अब सभी की नजरें 16 नवंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत यह देख सकती है कि सरकार की ओर से अधिसूचित नए नियम हवाई किराए में पारदर्शिता और यात्रियों को राहत देने के लिहाज से कितने प्रभावी साबित होते हैं। त्योहारों के दौरान महंगे टिकटों से परेशान यात्रियों को उम्मीद है कि नए प्रावधानों से मनमाने किराये पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी। फिलहाल यह मामला विमानन कंपनियों की किराया नीति, सरकारी निगरानी और यात्रियों के हितों के बीच संतुलन से जुड़ा एक अहम मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार के नए नियमों के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होगा कि हवाई यात्रा को आम लोगों के लिए अधिक पारदर्शी और किफायती बनाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

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