नयी दिल्ली: देश में हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतों और किराए में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह हवाई किराए को नियंत्रित करने के लिए तैयार किए गए प्रस्तावित नियमों की प्रति दो सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज संसद में पेश हुआ हो या नहीं, उसे निर्धारित समय में कोर्ट के समक्ष रखा जाए।
यह निर्देश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एयरलाइंस कंपनियां मांग बढ़ने के समय यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूलती हैं और मौजूदा व्यवस्था में इसे नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नियमों का अभाव है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि हवाई किराए के नियमन के लिए एक नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर लिया गया है। सरकार का कहना था कि इसे अगले 30 दिनों के भीतर संसद के दोनों सदनों के समक्ष पेश किए जाने की संभावना है। इस पर अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर नियमों की प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त तय की।
याचिका में मांग की गई है कि सरकार एयरलाइंस के किराया निर्धारण के लिए बाध्यकारी दिशा-निर्देश बनाए ताकि यात्रियों को मनमाने शुल्क से राहत मिल सके। इसके अलावा अतिरिक्त लगेज शुल्क, अन्य सहायक शुल्क, टिकट रद्द करने और रिफंड की एक समान नीति लागू करने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए एक स्वतंत्र विमानन नियामक संस्था गठित करने का सुझाव भी दिया है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी हवाई किराए में असामान्य वृद्धि पर चिंता जता चुका है। पूर्व सुनवाई के दौरान अदालत ने त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर टिकटों की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी का उल्लेख किया था। न्यायालय ने टिप्पणी की थी कि ऐसे समय में यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है और इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट नीति आवश्यक है।
विशेष रूप से कुंभ मेले और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान टिकटों के दाम सामान्य स्तर से कई गुना बढ़ने का मुद्दा भी अदालत के समक्ष उठाया गया था। अदालत का मानना है कि मांग बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संतुलित और पारदर्शी व्यवस्था होनी चाहिए।