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आचार संहिता केस में कन्हैया कुमार ने किया सरेंडर, कोर्ट से मिली जमानत

बेगूसराय: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़े आचार संहिता उल्लंघन मामले में सोमवार को बेगूसराय व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। अदालत में पेशी के बाद उन्हें 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई। इस मामले में उन पर चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी भवन पर […]

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  • July 13, 2026 5:20 pm IST, Published 60 minutes ago

बेगूसराय: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से जुड़े आचार संहिता उल्लंघन मामले में सोमवार को बेगूसराय व्यवहार न्यायालय में आत्मसमर्पण किया। अदालत में पेशी के बाद उन्हें 10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी गई। इस मामले में उन पर चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी भवन पर पोस्टर लगाए जाने का आरोप था।

मामले की सुनवाई सब जज प्रथम सह अवर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विवेक चंद्र वर्मा की अदालत में हुई। न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कन्हैया कुमार को जमानत प्रदान कर दी। अदालत से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर उनका पूरा भरोसा है और उन्हें विश्वास था कि कानून के अनुसार उचित निर्णय मिलेगा।

कन्हैया कुमार ने कहा कि यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान का है। उनके अनुसार, किसी सरकारी भवन पर उनके नाम का पोस्टर लगाए जाने के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था, जबकि उन्होंने स्वयं पोस्टर लगाने या ऐसा कोई निर्देश देने से इनकार किया। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि राजनीतिक जीवन में इस तरह के मुकदमे अक्सर दर्ज होते रहते हैं।

इस दौरान उन्होंने विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि विपक्ष के नेताओं पर नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए जाते हैं, जबकि सत्ता पक्ष के खिलाफ समान परिस्थितियों में कार्रवाई कम दिखाई देती है। हालांकि उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर उनका विश्वास कायम है और अदालत ने कानून के अनुसार निर्णय दिया है।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर कन्हैया कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव जनता की आवाज का माध्यम हैं और उन्हें उम्मीद है कि मतदान निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होगा। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र की जनता बदलाव चाहती है और इस बार मतदाता अपने फैसले से नई दिशा तय करेंगे।

राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा मामले पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि चूंकि मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हुआ है, इसलिए उससे जुड़े किसी भी गंभीर आरोप की जांच भी निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर बल दिया।

बिहार में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और सरकार अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर प्रभावी साबित नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जनता बेहतर कानून-व्यवस्था और जवाबदेही की अपेक्षा रखती है।

कन्हैया कुमार के अधिवक्ता ने बताया कि यह मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दर्ज किया गया था, जब वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार के रूप में बेगूसराय से चुनाव लड़ रहे थे। बछवारा थाना में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 188, धारा 171(H) तथा बिहार संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि सरकारी भवन पर चुनावी पोस्टर लगाए गए थे, जिसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना गया।

 

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