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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुराने रिश्वत आरोपोंकी जांच करेगी विजिलेंस, सियासी हलचल तेज

इस मामले की जांच का इतिहास भी पुराना है। वर्ष 2006 में ली की मौत के बाद KSTP परियोजना में कथित अनियमितताओं को लेकर विजिलेंस जांच शुरू हुई थी। बाद में कई शिकायतों की जांच की गई। इसमें ठेकों के आवंटन, भुगतान और परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़ी अनियमितताओं…

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  • November 4, 2026 1:29 pm IST, Published 2 hours ago

केरलम सरकार ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ करीब 20 साल पुराने रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच करानेका फैसला किया है। राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को मामले की प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए हैं। यह मामला उस समय का है, जब ज्ञानेश कुमार केरलम में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के पद पर तैनात थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने सड़क निर्माण परियोजना का काम पूरा होने के बाद भुगतान जारी करने के बदले 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। हालांकि, अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के नतीजों का इंतजार है।

पूरा मामला केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) से जुड़ा हुआ है। यह परियोजना राज्य में सड़कों के विकास और उन्नयन के लिए शुरू की गई थी। इसमें भारत और मलेशिया की संयुक्त कंपनी PATI-BEL को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी दी गई थी। कोल्लम जिले के चदयामंगलम निवासी ठेकेदार साजन ने आरोप लगाया है कि परियोजना के दौरान कंपनी के कई भुगतान रोक दिए गए थे। उस समय ज्ञानेश कुमार राज्य के PWD सचिव थे और विभाग के महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों की जिम्मेदारी उनके पास थी।

शिकायतकर्ता साजन के मुताबिक, परियोजना के तहत करीब 17 करोड़ रुपये के बिल इंजीनियरों की ओर से मंजूर किए जा चुके थे, लेकिन उनके भुगतान के लिए चेक जारी नहीं किए जा रहे थे। साजन का दावा है कि कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन ने उन्हेंबताया था कि भुगतान जारी कराने के लिए ज्ञानेश कुमार की ओर से 2 करोड़ रुपये की मांग की गई है। साजन के अनुसार, कंपनी रिश्वत देने केलिए तैयार नहीं थी। इसके चलते भुगतान में देरी होती रही और परियोजना से जुड़े ठेकेदारों तथा कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इस मामले में एक और गंभीर पहलू मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की आत्महत्या से जुड़ा है। साजन ने दावा किया है कि भुगतान में देरी और कथित रिश्वत की मांग के कारण ली पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। नवंबर 2006 में ली की आत्महत्या हो गई थी। शिकायतकर्ता का यह भीदावा है कि ली ने अपने सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम लिया था। साजन के मुताबिक, ली के परिवार के सदस्यों ने कंपनी के कर्मचारियोंको इस नोट के बारे में जानकारी दी थी। हालांकि, कथित सुसाइड नोट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टिहोना बाकी है।

साजन ने विजिलेंस विभाग को दिए गए अपने बयान में कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने मामले से जुड़े पुराने कर्मचारियों, इंजीनियरों, ठेकेदारों और ली के परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी देने की पेशकश भी की है। उनका आरोप है कि पहले हुईजांच में उनसे और कई अहम लोगों से पूछताछ नहीं की गई थी। ऐसे में अब वह चाहते हैं कि मामले की नए सिरे से विस्तृत जांच हो और सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएं।

इस मामले की जांच का इतिहास भी पुराना है। वर्ष 2006 में ली की मौत के बाद KSTP परियोजना में कथित अनियमितताओं को लेकर विजिलेंस जांच शुरू हुई थी। बाद में कई शिकायतों की जांच की गई। इसमें ठेकों के आवंटन, भुगतान और परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप शामिल थे। हालांकि, पिछली जांच में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले थे। विजिलेंस ने आगे कार्रवाई की जरूरत नहीं बताई थी और कुछ मामलों को अदालत में तथ्यात्मक गलती के आधार पर बंद करने कीरिपोर्ट दी गई थी। अब नई शिकायत के बाद पुराने दस्तावेजों और जांच की प्रक्रिया को दोबारा खंगालने की मांग उठी है।

इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व भी है। ज्ञानेश कुमार इन दिनों देशभर में विपक्षी दलों के निशाने पर हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस लगातार मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है।

इसी राजनीतिक माहौल के बीच केरलम में पुराने रिश्वत मामले की जांच का आदेश दिया गया है। गौरतलब है कि मई 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने 140 में से 97 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। इसके साथ ही कांग्रेसने केरलम में करीब 10 साल बाद सत्ता में वापसी की। नई सरकार के सामने अब इस पुराने मामले की निष्पक्ष जांच कराने की चुनौती है।

हालांकि, यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि किसी शिकायत के आधार पर जांच शुरू होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए रिश्वत के आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। अब विजिलेंस की जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या वास्तव में भुगतान रोककर रिश्वत मांगी गई थी, क्या पुराने मामले की जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट गया था और क्या उपलब्ध दस्तावेजोंतथा गवाहों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जांच की निष्पक्षता और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।

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