दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार थलापति विजय अब तमिलनाडु की राजनीति में तेजी से उभरते हुए नए चेहरे के रूप में सामने आ रहे हैं। बचपन से फिल्मी दुनिया में कदम रखने वाले विजय ने पहले एक सफल अभिनेता के रूप में पहचान बनाई और अब उन्होंने राजनीति में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।
पिछले दो वर्षों में विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी खड़ी कर राज्य की पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी है। तमिलनाडु में 1967 से सत्ता मुख्य रूप से DMK और AIADMK के बीच ही सीमित रही है। लेकिन विजय के उदय ने इस दो-ध्रुवीय राजनीति को बदलने का संकेत दिया है।
राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली DMK सरकार के बीच विजय की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। उन्हें जनता के बीच एक नए विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, खासकर युवा वर्ग में उनकी मजबूत पकड़ है।

इससे पहले सुपरस्टार रजनीकांत ने राजनीति में आने की घोषणा की थी, लेकिन बाद में उन्होंने कदम पीछे खींच लिए। वहीं कमल हासन की राजनीतिक कोशिशें भी सीमित प्रभाव छोड़ पाईं। ऐसे में विजय ने उस खाली स्थान को भरने का काम किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय का यह सफर तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। उनकी नई पार्टी और जनसमर्थन पारंपरिक दलों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय किस तरह से इस समर्थन को वोट में बदलते हैं।