• होम
  • देश
  • तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों को मिली जगह विजय सिन्हा को लेकर भाजपा ने दिया बड़ा संदेश

तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों को मिली जगह विजय सिन्हा को लेकर भाजपा ने दिया बड़ा संदेश

बिहार की नई सरकार के कैबिनेट विस्तार ने राज्य की राजनीति में परिवारवाद बनाम राजनीतिक विरासत की बहस को फिर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों को मंत्री बनाए जाने को लेकर हो रही है। कल हुए शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • May 8, 2026 11:39 am IST, Published 5 days ago

बिहार की नई सरकार के कैबिनेट विस्तार ने राज्य की राजनीति में परिवारवाद बनाम राजनीतिक विरासत की बहस को फिर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटों को मंत्री बनाए जाने को लेकर हो रही है। कल हुए शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन ने मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली।

यह बिहार के राजनीतिक इतिहास में पहला मौका माना जा रहा है, जब एक साथ तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे राज्य मंत्रिपरिषद का हिस्सा बने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुए इस शपथ ग्रहण ने राजनीतिक गलियारों में कई संदेश दिए। खासतौर पर निशांत कुमार की एंट्री को लेकर चर्चा सबसे ज्यादा रही, क्योंकि लंबे समय से राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत का सक्रिय राजनीति में आना बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

कैबिनेट विस्तार में सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवार ही नहीं, बल्कि कई दूसरे राजनीतिक घरानों से जुड़े चेहरों को भी जगह मिली। भाजपा और सहयोगी दलों के कई नेताओं के रिश्तेदारों को मंत्री बनाए जाने के बाद विपक्ष ने इसे खुलकर परिवारवाद बताया है। वहीं सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बता रहा है।

इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय सिन्हा को लेकर भी काफी चर्चा रही। पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे विजय सिन्हा को मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने सम्राट चौधरी पर भरोसा जताया। इसके बाद उनके नाराज होने की अटकलें तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि उन्होंने मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए गृह विभाग की मांग रखी थी, हालांकि इस पर उन्होंने कभी सार्वजनिक बयान नहीं दिया।

अब विभागों के बंटवारे में विजय सिन्हा को कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। पहले उनके पास राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और खान एवं भूतत्व विभाग थे, जिनका कुल बजट करीब 2268 करोड़ रुपये था। अब कृषि विभाग मिलने के बाद उनके पास लगभग 3446 करोड़ रुपये से अधिक बजट वाला बड़ा मंत्रालय आ गया है। यानी बजट और प्रशासनिक महत्व के लिहाज से उनका कद सरकार में और मजबूत हुआ है।

विजय सिन्हा ने मंत्री बनने के बाद कहा कि सरकार का लक्ष्य “विकसित बिहार” बनाना है और सभी मंत्री मिलकर राज्य के विकास के लिए काम करेंगे। वे पहले विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उपमुख्यमंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

कैबिनेट विस्तार के बाद बिहार की राजनीति में अब दो बड़ी चर्चाएं तेज हैं, एक तरफ परिवारवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा और सहयोगी दलों के भीतर शक्ति संतुलन को लेकर राजनीतिक विश्लेषण शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई टीम सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा को किस तरह आगे बढ़ाती है।  इससे एक कहानी फिर से शुरू हो चुकी है की क्या यह नियम लालू यादव और उनके जंगल राज के बीच को दिखा कर सिर्फ वोट लिया गया है |

Advertisement