भारत में सोना सिर्फ शौक या परंपरा नहीं, बल्कि निवेश और सुरक्षा का भी बड़ा जरिया माना जाता है। लेकिन अब यही Gold देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा रहा है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना कम खरीदने की अपील की है।
इस समय भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 690.69 अरब डॉलर यानी लगभग ₹64 लाख करोड़ है। वहीं 2025-26 में देश ने करीब 71.98 अरब डॉलर यानी लगभग ₹6.4 लाख करोड़ का सोना आयात किया। हर साल भारत करीब 700 से 800 टन Gold विदेशों से खरीदता है।
समस्या यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2025 के दौरान सोने की कीमत करीब 60 फीसदी तक बढ़ चुकी है। अभी एक किलो सोने की कीमत लगभग 1.52 लाख डॉलर पहुंच गई है। भारत ज्यादातर सोना Switzerland और UAE से खरीदता है, जिसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है।
यानी जितना ज्यादा Gold import होगा, उतने ज्यादा डॉलर देश से बाहर जाएंगे। इससे देश का आयात बिल बढ़ता है, चालू खाते पर दबाव आता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ता है। साथ ही रुपये पर भी कमजोरी का दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि रुपये की कीमत सिर्फ सोने से तय नहीं होती। कच्चे तेल की कीमत, विदेशी निवेश, Export और वैश्विक हालात भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं।