नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक अपील ने देश की अर्थव्यवस्था, बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पीएम मोदी ने लोगों से कहा है कि फिलहाल गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें। पहली नजर में यह सिर्फ एक आर्थिक सलाह लग सकती है, लेकिन इसके पीछे सरकार की बड़ी रणनीति छिपी हुई मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस एक बयान से मोदी सरकार ने घरेलू अर्थव्यवस्था को संभालने के साथ-साथ दुनिया, खासकर अमेरिका और डोनाल्ड ट्रम्प खेमे को भी एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। दरअसल, भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है। हर साल देश अरबों डॉलर का सोना विदेशों से खरीदता है। इसका सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर पड़ता है। ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार अस्थिर हैं, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव गहराता जा रहा है, तब सरकार विदेशी मुद्रा बचाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में सोने की मांग जितनी बढ़ती है, उतना ही डॉलर बाहर जाता है। यही वजह है कि पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि देशहित में कुछ समय तक सोने की खरीद सीमित रखें। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ सोना ही नहीं, बल्कि गैर-जरूरी खर्च और ईंधन की बर्बादी को भी कम करने की जरूरत है। सरकार इसे “आर्थिक राष्ट्रवाद” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान से जोड़कर देख रही है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान सिर्फ घरेलू अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। अमेरिका लगातार भारत पर रूस से तेल खरीदने और व्यापार संतुलन को लेकर दबाव बनाता रहा है। ऐसे में मोदी सरकार यह संदेश देना चाहती है कि भारत अपनी आर्थिक नीतियां खुद तय करेगा और किसी वैश्विक दबाव में नहीं आएगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से ट्रंप समर्थक लॉबी को भी संकेत देता है कि भारत अब आर्थिक मामलों में ज्यादा आत्मनिर्भर और आक्रामक रुख अपनाने को तैयार है। पीएम मोदी की इस अपील का असर बाजार में भी तुरंत देखने को मिला। कई ज्वेलरी कंपनियों और गोल्ड सेक्टर से जुड़े शेयरों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि अगर लोगों ने बड़े स्तर पर सोना खरीदना कम किया तो बाजार की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि जानकारों का कहना है कि भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा, सुरक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। शादी-ब्याह और त्योहारों में इसकी मांग पूरी तरह कम होना आसान नहीं होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने खास तौर पर शादी-ब्याह और बड़े आयोजनों में सोने की खरीद कम करने की अपील की है। भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्ट करने वाले देशों में शामिल है। हर साल अरबों डॉलर का सोना विदेशों से खरीदा जाता है। इससे देश से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर चली जाती है। सरकार का मानना है कि अगर कुछ समय के लिए सोने की खरीद सीमित की जाए, तो विदेशी मुद्रा पर दबाव कम किया जा सकता है।
सरकार पहले भी Sovereign Gold Bond और डिजिटल गोल्ड जैसी योजनाओं के जरिए लोगों को फिजिकल गोल्ड की जगह वैकल्पिक निवेश विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करती रही है। अब माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस दिशा में और बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने लोगों से ईंधन की खपत कम करने की भी अपील की है। उन्होंने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), मेट्रो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और कारपूलिंग को बढ़ावा देने की बात कही। सरकार का तर्क है कि तेल आयात कम होगा तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी और अर्थव्यवस्था पर दबाव घटेगा। यही वजह है कि “आत्मनिर्भर भारत” और वैकल्पिक ऊर्जा पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
पीएम मोदी ने लोगों से कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी विदेशी यात्राएं टालने की भी अपील की है। सरकार का मानना है कि विदेशों में छुट्टियां मनाने और डेस्टिनेशन वेडिंग पर भारी मात्रा में डॉलर खर्च होता है। ऐसे समय में जब वैश्विक संकट गहरा रहा है, सरकार चाहती है कि विदेशी मुद्रा का उपयोग जरूरी जरूरतों के लिए किया जाए।
प्रधानमंत्री की इस अपील का असर बाजार में तुरंत दिखाई दिया। सोमवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स करीब 1100 अंक टूट गया। ज्वेलरी और लग्जरी सेक्टर से जुड़े शेयरों में दबाव देखा गया। निवेशकों को डर है कि अगर सरकार सख्ती बढ़ाती है तो गोल्ड और लग्जरी मार्केट की मांग प्रभावित हो सकती है।
विपक्षी दलों ने इस बयान को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि अगर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती तो लोगों से सोना और विदेशी यात्रा छोड़ने की अपील नहीं करनी पड़ती। वहीं सरकार का कहना है कि यह कोई प्रतिबंध नहीं, बल्कि युद्ध जैसे वैश्विक हालात में जिम्मेदार नागरिक व्यवहार की अपील है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान केवल घरेलू अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। अमेरिका लगातार भारत पर व्यापार और रूस से तेल खरीद को लेकर दबाव बनाता रहा है। ऐसे में मोदी सरकार यह दिखाना चाहती है कि भारत वैश्विक दबावों के बीच भी अपनी आर्थिक रणनीति खुद तय करने में सक्षम है। इसे Donald Trump खेमे और पश्चिमी देशों के लिए भी एक संकेत माना जा रहा है कि भारत अब आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है।
फिलहाल पीएम मोदी की यह अपील केवल एक आर्थिक सलाह नहीं, बल्कि आने वाले समय की बड़ी रणनीतिक तैयारी के रूप में देखी जा रही है। अब नजर इस बात पर होगी कि जनता इस अपील को कितना गंभीरता से लेती है और इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है।
सरकार पहले भी सोने के आयात को कम करने के लिए कई कदम उठा चुकी है। Sovereign Gold Bond और डिजिटल गोल्ड जैसी योजनाएं इसी दिशा में शुरू की गई थीं, ताकि लोग फिजिकल गोल्ड की बजाय वैकल्पिक निवेश विकल्प अपनाएं। अब माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार डिजिटल निवेश और घरेलू बचत को बढ़ावा देने पर ज्यादा फोकस कर सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम मोदी का यह बयान केवल एक अपील नहीं, बल्कि आने वाले आर्थिक दौर का संकेत भी है। इससे सरकार ने एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश की है विदेशी मुद्रा बचाना, आयात घटाना, आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाना और दुनिया को यह संदेश देना कि भारत वैश्विक दबावों के बीच भी अपनी आर्थिक ताकत को मजबूत करने में जुटा है। अब देखने वाली बात होगी कि जनता इस अपील को कितनी गंभीरता से लेती है और क्या इसका असर वास्तव में देश की अर्थव्यवस्था और गोल्ड मार्केट पर दिखाई देता है।