गाजियाबाद: गाजियाबाद के भू-अर्जन विभाग में जमीन अधिग्रहण मुआवजे को लेकर एक और बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। एनआरआई महिला सरिता के नाम पर मुआवजा घोटाले के बाद अब डासना निवासी सुगरा के मुआवजे में भी गंभीर अनियमितता उजागर हुई है। मामले की जानकारी सामने आते ही जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मंदर ने जांच के आदेश देने की बात कही है।
दरअसल, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा डासना की रहने वाली सुगरा के बजाय कल्लूगढ़ी निवासी दूसरी सुगरा को जारी कर दिया गया। इससे पहले अमेरिका में रहने वाली एनआरआई सरिता की जमीन का मुआवजा भी गुरुग्राम की दूसरी महिला को दिए जाने का मामला सामने आया था। लगातार दो मामलों के उजागर होने के बाद भू-अर्जन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शनिवार को प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम रविन्द्र कुमार मंदर ने कहा कि पूरे मामले की जांच के लिए समिति गठित की जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर यह भी जांच की जाएगी कि आखिर दस्तावेजों के सत्यापन में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
इन घटनाओं के बाद कलक्ट्रेट स्थित भू-अर्जन विभाग में अफरा-तफरी का माहौल है। आशंका जताई जा रही है कि जमीन अधिग्रहण मुआवजे से जुड़े और भी मामले सामने आ सकते हैं। प्रशासन अब पुराने रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया की दोबारा जांच कराने की तैयारी में है।